mp high courtmlaneenaverma

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भोपाल । हाल फ़िलहाल में हुए कई चुनावों में भाजपा को जहाँ हार का सामना करना पड़ा है वही मोदी सरकार के कई आर्थिक फ़ैसलों से भी जनता नाराज़ दिखायी दे रही है। इसका असर चुनावों में भी दिखायी दे रहा है। केंद्र में सरकार बनने के बाद भाजपा के लिए यह सबसे कठिन दौर माना जा रहा है। अर्थव्यवस्था में मंदी हो या बेरोजगारी की बढ़ती हुई फ़ौज, विपक्ष लगातार जनहित के मुद्दों पर मोदी सरकार को घेर रहा है।

विपक्ष की मुहिम का असर पंजाब और मध्य प्रदेश उप चुनावों में भी दिखायी दिया। इन दोनो ही प्रदेश में भाजपा को मुँह की खानी पड़ी। ज़मीनी स्तर पर बढ़ती नाराज़गी के बीच भाजपा के लिए अदालती स्तर पर भी अच्छे दिन नही चल रहे है। इसका एक उदाहरण मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के एक फ़ैसले में देखने को मिला जहाँ कोर्ट ने भाजपा की एक विधायक का चुनाव शून्य घोषित कर दिया।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने धार से भाजपा विधायक नीना वर्मा का चुनाव शून्य घोषित कर दिया। कोर्ट ने नामांकन के समय ग़लत जानकारी देने के आरोप को सही मानते हुए यह फ़ैसला सुनाया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार धार से भाजपा विधायक नीना वर्मा के ख़िलाफ़ सूरिशचंद्र भंडारी ने हाई कोर्ट में याचिका डाली थी। अपनी याचिका में याचि ने आरोप लगाया था कि नीना ने नामांकन के समय कई ग़लत जानकरिया दी है।

इसके अलावा कुछ जानकरिया छुपाने का भी आरोप था। कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए 21 सितम्बर को अपना फ़ैसला सुरक्षित रखा था। न्यायधीश आलोक वर्मा ने मामले पर फ़ैसला सुनाते हुए नीना वर्मा का चुनाव शून्य घोषित कर दिया। न्यायधीश आलोक वर्मा सात दिन बाद रिटायर होने वाले है, ठीक उससे पहले उन्होंने यह फ़ैसला सुनाया। यह दूसरी बार हुआ है जब नीना का चुनाव शून्य घोषित हुआ हो। इससे पहले 2012 में भी ऐसा हो चुका है।

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