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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नव वर्ष की संध्या पर देश के नाम संबोधन पर NDA की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि  प्रधानमन्त्री राष्ट्र को संबोधित करते हुए जरा भी गंभीर नहीं थे. लाइनों में खड़े होकर 400 से ज्यादा लोगों की जान गई. सभी मृतकों के परिवार सरकार को कोस रहे होंगे.

शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में आज प्रकाशित लेख में कहा गया कि  ‘‘लोगों को आशा थी कि प्रधानमंत्री मोदी उनके जख्मों पर मरहम लगाएंगे. लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि राष्ट्र को संबोधित करते हुए मोदी जरा भी गंभीर थे. लाइनों में खड़े होकर 400 से ज्यादा लोगों की जान गई. सभी मृतकों के परिवार सरकार को कोस रहे होंगे.’’ शिवसेना ने कहा कि जिन परिवारों के सदस्य मरे हैं उनके लिए मोदी की घोषणाओं का कोई मोल नहीं है.

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साथ ही प्रधानमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं को पूर्व यूपीए सरकार की घोषणा बताते हुए कहा कि ‘मोदी द्वारा घोषित कई योजनाएं पुरानी हैं और संप्रग सरकार के समय से चल रही हैं. उदाहरण के लिए अस्पताल में प्रसव के बाद जच्चा को 6,000 रुपये देने की घोषणा खाद्य सुरक्षा कानून के तहत 2013 से ही चल रही है.’’ पार्टी ने कहा कि किसानों के लिए घोषित योजनाओं में भी गड़बड़ है.

इसके अलावा शिवसेना ने सवाल उठाते हुए पूछा कि भारतीय रिजर्व बैंक जिला सहकारी बैंकों में जमा चलन से बाहर हुए नोटों को स्वीकार करने को तैयार नहीं है. ऐसे में यह वित्तीय नुकसान उन बैंकों को उठाना होगा. अब प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि कृषि ऋण का बोझ सरकार उठाएगी. सवाल यह है कि यह बैंक इतने भारी बोझ को कैसे उठा सकेंगे.’’

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