मुरादाबाद सीट से भाजपा प्रत्याशी कुंवर सर्वेश कुमार सिंह ने चुनावों से पहले ही करीब करीब अपनी हार मान ली है।भाजपा प्रत्याशी का कहना है कि मुस्लिम वोटों के एक साथ आ जाने के कारण इस बार उनके लिए सीट बचाना मुश्किल है।

भाजपा उम्मीदवार ने पीटीआई के साथ फोन पर बातचीत के दौरान बताया कि वह मुरादाबाद से दोबारा सांसद निर्वाचित होने को लेकर आश्वस्त नहीं हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव इस बार मुश्किल होगा। मुस्लिम वोट नहीं बंट पा रहे हैं। कुंवर सर्वेश कुमार ने ये भी बताया कि इस बार चुनाव यहां कांग्रेस बनाम भाजपा है।

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बता दें कि कांग्रेस ने मुरादाबाद से इमरान प्रतापगढ़ी को अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं सपा-बसपा-रालोद गठबंधन ने एसटी हसन को मैदान में उतारा है। कांग्रेस और गठबंधन के प्रत्याशी मुस्लिम हैं, ऐसे में मुस्लिमों के वोट बंटने के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन अब बताया जा रहा है कि मुरादाबाद के मुस्लिम मतदाताओं ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि वह किसका समर्थन करेंगे, लेकिन मिल रही जानकारी से यह बात निकलकर सामने आयी है कि मुरादाबाद के मुस्लिम वोटर, वोट बंटने देने के मूड में बिल्कुल नहीं है और जहां भी वोट देंगे, वहां एकमुश्त वोट देने पर विचार कर रहे हैं, ताकि उनका समर्थन निर्णायक साबित हो सके। मुरादाबाद में मुस्लिमों के अलावा जाटव भी 9 प्रतिशत के करीब हैं और पारंपरिक तौर पर बसपा के वोटर माने जाते हैं।

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मुरादाबाद लोकसभा सीट में मुस्लिम वोटबैंक काफी प्रभावशाली और लोकसभा की कुल जनसंख्या का 47 प्रतिशत हिस्सा मुस्लिम समुदाय है। यही वजह है कि मुस्लिम वोटबैंक के एक हो जाने के चलते भाजपा की उम्मीद धूमिल दिखाई दे रही है। हालांकि भाजपा के प्रत्याशी कुंवर सर्वेश सिंह इलाके के प्रभावशाली नेता माने जाते हैं और पूर्व में मुरादाबाद लोकसभा के अन्तर्गत आने वाली ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट से 5 बार विधायक रह चुके हैं। 2014 में मुरादाबाद से सांसद बने और अब उनका बेटा भी बरहापुर से विधायक है।

2014 में मोदी लहर के बीच यहां के स्थानीय कद्दावर नेता कुंवर सर्वेश सिंह ने बाजी मारते हुए इतिहास रचा था, जो मुरादाबाद लोकसभा सीट पर बीजेपी की पहली जीत थी। इससे पहले हालांकि, दो बार (1967 व 1971) भारतीय जनसंघ को जरूर यहां से जीत मिली, लेकिन 1952 के बाद से अधिकतर चुनाव में यह सीट वैचारिक तौर पर बीजेपी के विरोधी दलों के खाते में जाती रही है, खासकर समाजवादी पार्टी की स्थिति यहां काफी मजबूत रही है।

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