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मुंबई । हमारे देश में पूरे साल कही न कही चुनाव होते रहते है। हर चुनाव में मुद्दा विकास होता है लेकिन वोटिंग आते आते विकास हवा हो जाता है और जातिगत और धार्मिक मुद्दे बड़े बन जाते है। सब राजनीतिक दलो को लगता है की जाति और धर्म की बात करके ही चुनाव जीते जा सकते है। इस पर मीडिया में ख़ूब बहस होती है लेकिन चुनाव आते आते सब कुछ भूला दिया जाता है। अंत में वोट जाति के आधार पर डाली जाती है।

इस बारे में आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत का मानना है की चूँकि हमारा समाज जात पात पर ही वोट देता है इसलिए मजबूरन राजनेता को भी जातिगत राजनीति करनी पड़ती है। मुंबई में बॉम्बे स्टॉक इक्स्चेंज द्वारा आयोजित कॉन्फ़्रेन्स ‘व्यापार में राष्ट्रवाद और नतिक आचरण’ में बोलते हुए भागवत ने ये बातें कही। उन्होंने कहा,’ समाज में जितनी नैतिक आचरण की आदत है, उतनी राजनीति में दिखाई देती है।’

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उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा,’ अगर मैं सोचूँ की मुझे जात पात की राजनीति नही करनी, ऐसा सोचकर मैं वोट माँगने जाता हूँ तो भी समाज तो जात पात पर ही वोट करता है। इसलिए मुझे भी ऐसी ही बातें करनी पड़ती है। मुझे वहां टिकना है, तभी मैं परिवर्तन लाऊंगा। तो समाज परिवर्तन से राजनीतिक व्यवस्था में परिवर्तन होता है, उल्टा नहीं होता।’

व्यापार में सरकार की भूमिका पर उन्होंने कहा,’ वह सरकार अच्छी है जो कम नियंत्रण रखती है। हमें उसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, परंपरागत रूप से भारत सबसे व्यक्तिपरक देश रहा है, जहां हर किसी को उसके मुताबिक काम करने की आजादी है और देश के लोगों को उनके कार्यों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। वे जो भी करना चाहते हैं, अगर वे राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर करें तो सरकारी नियंत्रण या नियमों के लिए कोई जरूरत नहीं होगी।’

रोज़गार पैदा करने पर बल देते हुए उन्होंने कहा,’ भारत उत्पादन का विकेंद्रीकरण करे और लोगों को प्रशिक्षण दें, उन्हें शिक्षित करे। ऑटोमेशन और तकनीक किसी कारोबार को चलाने में अहम भूमिका निभाते हैं, ऐसे में कंपनी मालिकों को देश और कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए नैतिकता के साथ अपना कारोबार चलाना चाहिए।’

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