आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भारत और अमेरिका के बीच टू प्लस टू डायलॉग को लेकर गुरुवार को लोक सभा में स्थगन प्रस्ताव पेश किया। उन्होने मोदी सरकार पर राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता करने का गंभीर आरोप लगाया।

ओवैसी ने कहा भारत सरकार जानबूझकर संप्रभुता को दूसरे देशों को सौंप रही है और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता कर रही है। ओवैसी ने कहा, ‘टू प्लस टू मीटिंग के दौरान अमेरिका के साथ संचार अनुकूलता और सुरक्षा समझौतों पर जल्दी हस्ताक्षर कर भारत कगार पर है। इससे भारत सरकार जानबूझकर राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता कर रही है।’

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दूसरी और एनआरसी के मुद्दे पर ओवैसी ने केंद्र की भाजपा सरकार पर सुविधा और पहचान की राजनीति करने की बात कही। ओवैसी ने कहा कि वह असमी पहचान को तो बकरार रखना चाहती है लेकिन कश्मीरी पहचान को नहीं।

उन्होने ट्वीट किया, ‘‘भाजपा 40 लाख लोगों की पहचान की कुर्बानी की कीमत पर असमी पहचान को बरकरार रखना चाहती है… लेकिन कश्मीर में भाजपा कश्मीरी पहचान को कमजोर करने के लिए अनुच्छेद 35 को रद्द करना चाहती है?’’ उन्होंने कहा कि भाजपा सुविधा और पहचान की राजनीति कर रही है। पार्टी को राजनीतिक रूप से जहां जो सही लगता है वहां वह वो कर रही है।

ओवैसी ने आगे कहा, दूसरी तरफ, शीर्ष अदालत चकमाओं के प्रति अधिक सहानुभूतिपूर्ण थी जो पूर्व पूर्वी पाकिस्तान और आज के बांग्लादेश के चटगांव हिल ट्रैक्ट्स और माईमेंसिंघ जिलों के बौद्ध निवासी थे।

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