कथित गौरक्षा के नाम पर देश में ली जा रही लोगों की जान पर देश की सर्व्वोच अदालत पहले केंद्र की मोदी सरकार को फटकार लगाते हुए कानून बनाने का निर्देश जारी कर चुकी है। इस मामले में बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी का कहना है कि आर्थिक गैरबराबरी (असमानता) के कारण ये घटनाएं होती हैं।

बंगाल प्रवासी कार्यकर्ता माणिक रॉय और केरल के आदिवासी युवक मधु की हत्या के मामलों का उल्लेख करते हुए लेखी ने लोकसभा में कहा कि ये घटनाएं आर्थिक असमानता के कारण हुई थीं। उन्होंने कहा, ‘यह आर्थिक असमानता के कारण है।’

बता दें कि पिछले महीने केरल के तिरुवनंतपुरम में मुर्गी चोरी के आरोप में  कुछ लोगों ने रॉय की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। वहीं फरवरी में 30 साल के आदिवासी युवक मधु के ऊपर चोरी का आरोप लगाते हुए कुछ लोगों ने उसकी जोरदार पिटाई की थी, जिसके बाद उसकी मौत हो गई थी।

हालांकि इन दोनों मामलों के साथ देश में कथित गौरक्षा के नाम पर दलितों, आदिवासियों और मुस्लिमों की पीट-पीट कर हत्या के कई मामले सामने आए है। जिन पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को राज्यों को स्थिति की गंभीरता समझाते हुए सलाह देने और इससे निपटने के लिए कदम उठाने के लिए कहने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने कहा कि ‘भीड़तंत्र के भयानक कार्यो’ को ‘एक नई सामान्य घटना’ बनने की इजाजत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने विशेष कानून बनाने की बात कहते हुए कहा, ‘एक विशेष कानून डर का माहौल पैदा करेगा। इसमें कोई संदेह नहीं है कि कानून का डर और कानून के आदेश का आदर एक सभ्य समाज की आधारशिला रखते हैं।’

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