हिन्दी भाषा को लेकर बवाल, मनसे ने कहा – हमारे माथे पर मत थोपो, सिद्दारमैया ने बताया – राज्यों पर हमला

1:37 pm Published by:-Hindi News

मुंबई. राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में हिंदी समेत 3 भाषाओं का प्रस्ताव रखे जाने का राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। दक्षिण के राज्यों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। दक्षिण भारत की राजनीतिक पार्टियों का कहना कि इस फॉर्मूले के तहत हिंदी उन पर थोपी जा रही है जिसका वे विरोध करेंगे।

वहीं अब महाराष्ट्र में भी विरोध होने लगा है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रवक्ता ने रविवार को ट्वीट कर कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा नहीं है। हम पर यह जबरन थोपी न जाए। इसके पहले नई शिक्षा नीति का तमिलनाडु में भी विरोध हुआ था। द्रमुक नेता एमके स्टालिन ने कहा कि यह देश को बांटने वाला प्रस्ताव है।

इसके अलावा सिद्दारमैया ने सोमवार के हिंदी थोपे जाने के विरोध में कई ट्वीट किए। सिद्दारमैया ने कहा, ‘नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में गैर-हिंदी राज्यों पर हिंदी थोपी जा रही है जो कि हमारी भावनाओं के खिलाफ है।’ पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंदी को थोपने के बजाय सरकार को राज्यों की क्षेत्रीय पहचान को आगे बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। राज्यों को अपने विचार, अपनी संस्कृति एवं एवं अपनी भाषा की अभिव्यक्ति के लिए ज्यादा अवसर मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘यदि कुछ लोगों की नजर में क्षेत्रीय पहचान कुछ महत्व नहीं रखता है तो हिंदी को थोपना और कुछ नहीं बल्कि हमारे राज्यों पर एक क्रूर हमला है।’ हालांकि रविवार को केंद्र सरकार ने अपना बचाव करते हुए कहा था कि किसी भी राज्य पर हिंदी थोपी नहीं जाएगी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस मामले में अपने ट्विटर पर संदेश प्रसारित किए और यह भरोसा दिलाया कि इस ड्राफ्ट को अमल में लाने से पहले इसकी समीक्षा की जाएगी। मोदी सरकार के ये दोनों ही मंत्री तमिलनाडु से हैं।

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