नई दिल्ली : नागरिकता संशोधन बिल 2019 पर राज्यसभा की बहस में शामिल होते हुए जम्मू-कश्मीर की पीडीपी के राज्यसभा सांसद मीर एम फैयाज ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि ये सरकार जब से बनी है मुसलमानों के पीछे पड़ी है। पहले ट्रिपल तालाक कानून बनया फिर आर्टिकल 370 को हटा दिया। ऐसे में पीडीपी CAB का विरोध करती है और इसके खिलाफ ही वोट करेगी।

उन्होंने कहा कि मैं इस बिल का विरोध करने के लिए खड़ा हुआ हूं। जब से यह सरकार सत्ता में आई है, तब से इसने ट्रिपल तालाक और अनुच्छे 370 बिल लाकर मुसलमानों को टारगेट किया है। ये सरकार जब सी बनी है, तब ये मुसलमान के पीछे पड़ी है।

वहीं सपा के जावेद अली ने इस विधेयक में 31 दिसंबर 2014 की तय समयावधि को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि 31 दिसंबर 2014 के बाद ऐसा क्या हो गया कि इन तीनों पड़ोसी देशों (पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बंगलादेश) में अल्पसंख्यकों के साथ धार्मिक प्रताड़ना बंद हो गयी।

उन्होंने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि इस समय सीमा के लिए उसे ऐसा क्या ‘‘इलहाम’’ हुआ है? उन्होंने सुझाव दिया कि इस विधेयक में तीन देशों के बजाय पड़ोसी देश और धार्मिक अल्पसंख्यक लिखना चाहिए, इससे सारा विवाद खत्म हो जाएगा।

इसके अलावा कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि भारतीय संविधान धार्मिक आधार पर भेदभाव का स्पष्ट रूप मना करता है। संविधान की इस मूल भावना का पालन करते हुए मानवीय आधार पर नागरिकता दी गई। इसलिए हम धार्मिक आधार पर नागरिकता देने को संविधान के विरूद्ध मानते हुए इस बिल का विरोध कर रहे हैं।

शर्मा ने बिल को बीजेपी के घोषणापत्र का हिस्सा होने के कारण इसे लागू करने की प्रतिबद्धता को राजहठ करार देते हुए कहा कि किसी दल का घोषणापत्र संविधान से नहीं टकरा सकता है, ना उसके ऊपर जा सकता है। लेकिन हम सभी ने संविधान की शपथ ली है इसलिए हमारे लिए पार्टी का घोषणापत्र नहीं संविधान सर्वोपरि है।

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