जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम और पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने शनिवार को अपनी पार्टी के स्थापना दिवस पर कहा कि उन्हें शुरू से ही भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर संदेह था। उनके पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद ने भी इसका विरोध किया था। लेकिन उन्होंने इसे खारिज करते हुए गठबंधन कर लिया।

उन्होंने कहा, ‘‘अल्लाह गवाह है कि मेरी राजनीति मेरे पिता (सिद्धांतों) से शुरू हुई और उन्हीं पर समाप्त होगी। यही कारण है कि जब उन्होंने दुनिया छोड़ी तो मैं सरकार बनाने के लिए तैयार नहीं थी। मुझे तीन महीने का समय लगा…मैंने यह कभी नहीं सोचा था कि मैं मुख्यमंत्री बनूंगी। मैंने केवल जम्मू कश्मीर के लोगों को वर्तमान स्थिति से बाहर निकालने के अपने पिता के एजेंडे को पूरा करने के बारे में सोचा।’’

पीडीपी अध्यक्ष ने बताया, ‘‘उस समय कार्यकर्ताओं, विधायकों और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने मुझसे कहा कि निर्णय मुफ्ती साहब द्वारा किया गया था और आपको यह जहर पीना होगा और यह आग अपने सिर पर लेकर चलना होगा। यदि आप ऐसा नहीं करेंगी तो यह मुफ्ती साहब के निर्णय का अनादर होगा।’’ महबूबा ने कहा कि यहां तक कि जब उन्होंने भाजपा के साथ सरकार बनाने की सहमति दी, उन्होंने पार्टी नेताओं से कहा कि वे मुख्यमंत्री के तौर पर किसी अन्य व्यक्ति को चुन लें।

modi mehbooba

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि भाजपा-पीडीपी का गठबंधन उनके लिए जहर के घूंट पीने जैसा था। इस दौरान उन्होंने काफी दबाव में काम किया। राज्य में एक सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की। यही वजह रही कि रमजान के महीने में सीजफायर का फैसला लिया गया।

पीडीपी प्रमुख कहा कि मेरे प्रयास से ही पीएम मोदी लाहौर गए। मैंने दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधारने की काफी कोशिश की। आज मैं प्रधानमंत्री से अपील करती हूं कि पाकिस्तान के चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी तहरीक-ए-इंसाफ के अध्यक्ष इमरान खान को एक सकारात्मक संदेश भेजें ताकि दोनों देशों के बीच बेहतर रिश्ते हों।