नई दिल्ली : शुक्रवार को सुबह न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च शहर की दो मस्जिद में हुए आतंकी हमले में अब तक कम से कम 49 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 48 से ज्यादा लोग जख्मी बताए जा रहे हैं। इस हमले को अंजाम देने वाले 28 वर्षीय ब्रेंटन टैरंट को गिरफ्तार कर लिया गया है।

इस हमले को लेकर ने केवल मीडिया में दोगलापन देखने को मिला। बल्कि भारतीय नेताओं ने भी इस हमले की आलोचना करना जरूरी नहीं समझा। हमले को लेकर जहां दक्षिणपंथी सोशल मीडिया पर खुशियाँ मना रहे थे। तो वहीं लिबरल और सेक्युलरों पूरी तरह से खामोश थे। इस हमले को लेकर देश की सत्तारुड और विपक्षी पार्टी ने एक शब्द भी कहना जरूरी नहीं समझा।

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जब इस मामले में कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने सवाल उठाया तो काँग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की और से ट्वीट आया। दरअसल महबूबा मुफ़्ती ने ट्वीट किया कि अजीब बात है कि न तो पीएम और न ही कांग्रेस के किसी व्यक्ति ने NZ हमले की निंदा की है। आतंकवाद का कोई धर्म नहीं है लेकिन दुर्भाग्य से इसका इस्लाम के साथ जुड़ना आसान और सुविधाजनक हो गया है। क्या आपराधिक चुप्पी सिर्फ इसलिए है क्योंकि हमले एक मस्जिद में मुसलमानों के खिलाफ थे? उन्होने आगे लिखा, हम सभी के पास इससे सीखने के लिए एक या दो सबक हैं। अगर यहां वही घटना होती, तो नेतृत्व की और से इसका राजनीतिकरण कर दिया होता, युद्ध छेड़छाड़ में लिप्त मुसलमानों के खिलाफ हमले का समर्थन कर देते।

महबूबा मुफ़्ती के सवाल उठाने के बाद राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि ”न्यूजीलैंड में गोलीबारी की घटना एक निन्दनीय कृत्य है। शत्रुता और घृणा से अतिवाद पनपता है। पीड़ित परिवारों के प्रति मेरी संवेदना है। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।”

वहीं पीएम मोदी ने कहा कि न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जोर दिया कि विविधतापूर्ण और लोकतांत्रिक समाज में हिंसा के लिये कोई स्थान नहीं है। एक आधिकारिक वक्तव्य के अनुसार पीएम मोदी ने अपनी चिट्ठी में क्राइस्टचर्च में जघन्य हमले में मारे गए लोगों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की और घायलों के जल्दी स्वस्थ होने की कामना की। पीएम मोदी ने इस कठिन घड़ी में न्यूजीलैंड के मित्रवत लोगों के प्रति पूरी एकजुटता व्यक्त की

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