जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती ने सोमवार को केंद्र सरकार से देश में निवास कर रहे कश्मीरियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। दोनों नेताओं ने पूरे देश में साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की।

बता दें कि गुरुवार को हुए हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए थे। जिसके बाद देश के कई हिस्सों में कश्मीरियों पर हमले की खबरे सामने आई थी। उत्तराखंड की राजधानी में पढ़ने वाले कुछ कश्मीरी युवकों ने आरोप लगाया है कि उनके साथ बदसलूकी की गई और उनके मकान मालिकों ने उन्हें मकान खाली करने के लिए भी कहा।

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नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि ‘‘कश्मीरियों पर हमले कर, उन्हें डरा कर हम कश्मीरी युवाओं/बच्चों को परोक्ष रूप से यह बता रहे हैं कि घाटी से बाहर उनका कोई भविष्य नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि कश्मीरियों को डराने का लक्ष्य भारत के विभिन्न समुदायों के बीच अलगाव पैदा करना है।

महबूबा मुफ्ती ने पुलवामा मुठभेड़ में शहीद हुए सैनिकों के परिजनों के प्रति संवेदनाएं जताते हुए कहा कि यह खूनी खेल तभी रूकेगा जब केन्द्र जम्मू-कश्मीर को लेकर अपना रवैया बदलेगा। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया है, ‘‘परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं। खूनी खेल तभी रूकेगा जब भारत सरकार जम्मू-कश्मीर को लेकर अपना रवैया बदलेगी।’’

उन्होंने पाकिस्तान को लेकर ‘‘अपना जुनून खत्म करने’’ और अपने घर को संभालने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान को लेकर जुनून छोड़ें और अपने घर को संभालें। मौजूदा रूख से हालात बिगड़ेंगे ही और देश का ध्रुवीकरण होगा।’’

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