दलितों के बीच अपना जनसमर्थन खो रही बसपा प्रमुख मायावती ने धर्म परिवर्तन का कार्ड खेलते हुए सोमवार को ऐलान किया कि बाबा साहब भीमराव आंबेडकर की तरह ही वह भी हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लेंगी। हालांकि, यह फैसला वह सही और उचित समय पर लेंगी।

मायावती ने कहा कि ऐसा तब होगा जब पूरे देश में बड़ी संख्या में लोग धर्मांतरण करें। धर्मांतरण की यह प्रक्रिया भी तब ही संभव है जब बाबासाहब के अनुयायी राजनीतिक जीवन में भी उनके बताए रास्ते का अनुसरण करें।

आरएसएस प्रमुख के हिंदू राष्ट्र वाले बयान पर मायावती ने कहा, उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख के ‘हिंदू राष्ट्र’ बयान से सहमत नहीं है। बाबासाहब आंबेडकर ने धर्मनिरपेक्षता के आधार पर संविधान बनाया था। उन्होंने धर्मनिरपेक्षता के आधार पर सभी धर्म के लोगों का ख्याल रखा था।

उन्होंने कहा, आरएसएस प्रमुख को इस तरह का बयान देने से पहले सच्चर समिति की रिपोर्ट पढ़नी चाहिए। गौरतलब है कि विजयादशमी के अवसर पर नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख ने कहा था कि भारत हिंदू राष्ट्र है और यहां के मुस्लिम बहुत खुश हैं।

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