आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के सेना से जुड़े विवादित बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती ने आरएसएस स्वयंसेवकों को मिलिटेंट करार दिया.

मायावती ने आरएसएस स्वयंसेवकों की तुलना आंतकियों से करते हुए कहा कि अपने मिलिटेंट स्वयंसेवकों की सुरक्षा में रहें भागवत क्यों कमांडो की सुरक्षा में रहते हैं. उन्होंने मोहन भागवत से अपने बयान के लिए माफ़ी की भी मांग की.

ध्यान रहे मोहन भागवत ने कहा था कि सेना के लोग युद्ध की स्थिति में तैयार होने में 6 से 7 महीने का समय लगा सकते हैं, लेकिन हमारे लोग यानी संघ के कार्यकर्ता 2 से 3 दिन में ही तैयार हो जाएंगे.  बसपा सुप्रीमो ने कहा, ऐसे समय में जबकि भारतीय सेना को विभिन्न प्रकार की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, संघ प्रमुख का बयान सेना का मनोबल गिराने वाला है जिसकी इजाजत उन्हें कतई नहीं दी जा सकती.

मायावती ने कहा कि वैसे भी मोहन भागवत को आर.एस.एस. के स्वंयसेवकों के सम्बम्ध में यह भ्रम अब दूर कर लेना चाहिये कि वे लोग निःस्वार्थ काम कर रहे हैं क्योंकि आर.एस.एस. अब एक ’’सामाजिक संगठन’’ नहीं रहकर बहुत तेजी के साथ राजनीतिक संगठन बनती जा रही है और उनके स्वंयसेवक सामाजिक सेवा को ताक पर रखकर पूरी तरह से बीजेपी की चुनावी राजनीति करने में ही व्यस्त नज़र आते हैं.

हालांकि मोहन भागवत के बयान पर चौतरफा निंदा और आलोचना होने के बाद राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ ने सोमवार को स्पष्टीकरण जारी किया था. संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि “सरसंघचालक मोहन भागवत जी के मुजफ्फपुर (बिहार) में दिए वक्तव्य को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है.

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