कांग्रेस के वरिष्ट नेता और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इन दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आक्रामक रुख अपनाए हुए है. अपने अतीत के जरिए पूर्व प्रधानमंत्री ने पीएम मोदी को आईना दिखाने की कोशिश की है.

शनिवार को सूरत पहुंचे मनमोहन सिंह ने जब उनकी अतीत और गरीबी के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि मैं अपने बैकग्राउंड के बारे में मोदी जी के साथ किसी तरह की प्रतिस्पर्धा में नहीं उतरना चाहता हूं. ताकि देश मुझ पर तरस खाए.

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दरअसल, उनसे सवाल किया गया था कि वह अपनी गरीबी की पृष्ठभूमि के बारे में बात क्यों नहीं करते हैं, जिस तरह मोदी हमेशा बचपन में अपने परिवार की मदद के लिए गुजरात के रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने की बात करते हैं.

ध्यान रहे मनमोहन सिंह का जीवन बेहद ही कष्टों में बीता है. वे विभाजन से पूर्वे पंजाब के गाह गांव में 1932 में पैदा हुए थे. वे अपने परिवार के साथ 1947 में विभाजन के दौरान भारत के अमृतसर आये. अपने जीवन के शुरुआती 12 सालों तक वह गांव में ही रहे, जहां न बिजली थी, न स्कूल था, न अस्पताल था और न ही पाइपलाइन से आपूर्ति किया जाने वाला पानी ही था.

मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार संजय बारू के मुताबिक, मनमोहन सिंह स्कूल जाने के लिए रोज मीलों चलते थे और रात में केरोसिन तेल की ढिबरी (बत्ती) की मंद रोशनी में पढ़ाई किया करते थे. एक बार जब उनसे उनकी कमजोर नजर को लेकर पूछा गया था तो उन्होंने कहा था कि वह मंद रोशनी में घंटों किताबें पढ़ा करते थे.

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