पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एनआरसी ड्राफ्ट को लेकर मोदी सरकार पर भड़क उठी है. ममता ने नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) ड्राफ्ट को मोदी सरकार की बंगालियों के खिलाफ साजिश करार दिया. उन्होंने इसकी तुलना 1960 के बंगाल खेदा आदोलन से की.

ममता बनर्जी ने यहां एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘लोग वहां (असम में) काम करने गये हैं. एनआरसी के नाम पर वे उन्हें खदेड़ रहे हैं. मैं केंद्र की भाजपा सरकार को आग से नहीं खेलने की चेतावनी देती हूं. उसे बांटो और राज करो की नीति पर नहीं चलना चाहिए.’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह करीब 1. 80 करोड़ लोगों को राज्य से खदेड़ने की केंद्र सरकार की साजिश है.’’ उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों के लोग रोजी रोटी के लिए जाते हैं जो उनका हक है तथा धीरे धीरे वे वहां बस जाते हैं जैसे कि अन्य राज्यों के लोग पश्चिम बंगाल में रह रहे हैं और ठहरे हुए हैं.

ममता बनर्जी ने कहा, ‘‘हम लोगों के पक्ष में आवाज उठाते रहेंगे और यदि उन्हें कुछ हुआ तो हम चुप नहीं रहेंगे.’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि असम में समस्या खड़ी होती है तो उसका बंगाल पर असर होगा लकिन हम बंगाल में रह रहे असमी को हृदय से लगाकर रखेंगें.

उन्होंने कहा कि बंगाल के 70 फीसद से अधिक लोगों के नाम एनआरसी के पहले मसौदे में दर्ज नहीं हुए हैं. दक्षिण असम में सबसे ज्यादा बंगाली प्रभुत्व वाला बराक घाटी है. ममता ने तृणमूल सांसदों से गुरुवार को एनआरसी के खिलाफ संसद में आवाज उठाने का भी आदेश दिया.

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