2019 में लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटे विपक्ष में एकता का अभाव एक फिर से नजर आया। जब प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बनने से ममता बनर्जी ने इंकार कर दिया।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा, मैं हाथ जोड़ कर मीडिया से प्रार्थना करती हूं कि अभी प्रधानमंत्री पद के लिए किसी विपक्षी नेता का नाम नहीं उछाले। आप लोग किसी के नाम का कयास लगाकर विपक्षी दलों को आपस में लड़ाना चाहते हैं। यह करने से आप सिर्फ भाजपा की मदद ही करेंगे।

इससे पहले ममता ने कहा कि अगले लोकसभा चुनाव के लिए बन रहे महागठबंधन में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम फिलहाल तय नहीं किया जाना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो इससे क्षेत्रीय पार्टियों की एकता पर असर पड़ेगा। भाजपा के खिलाफ सभी क्षेत्रीय पार्टियों को एक साथ आना चाहिए और देश के हित में कुर्बानी देनी चाहिए। हमें लोगों के लिए लड़ाई लड़नी है। 2019 में हम लोगों की, लोगों के द्वारा और लोगों के लिए सरकार बनाएंगे।

उन्होने कहा कि  यह काम तभी उचित होगा जब गठबंधन बने, साथ चुनाव लड़े और भाजपा को हरा दे। तब लगने वाले कयासों पर हमें कोई आपत्ति नहीं होगी।

ममता का ये बयान उमर अब्दुल्ला के साथ मुलाक़ात के बाद आया था। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वे प्रदेश सरकार बहुत ही अच्छी तरह से चला रही हैं। उनके राज्य में जनता खुश है।  हम चाहते हैं कि वे दिल्ली चलें और ऐसे ही वे देश की सरकार चलाएं जैसी वे अपने प्रदेश की चला रहीं हैं।