असम में आज जारी हुए नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन के फाइनल ड्राफ्ट में करीब 40 लाख लोगों को भारत का अवैध नागरिक घोषित कर दिया गया है। ऐसे में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह से सवाल किया कि क्या इन 40 लाख लोगों को जबरदस्ती निकाला जायेगा ?

उन्होंने कहा कि हर राज्य में बाहर से आये लोग रहते हैं। असम में संवाद की सभी सेवाएं बंद कर दी गई हैं। महिलाओं और बच्चों को जेल भेज दिया गया है। यह एक चुनवी राजनीति है। क्या इन लोगों को जबरदस्ती बाहर निकाला जायेगा। उन्होंने कहा कि सरकार की नीति बांटो और राज करो की है।

बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा कि 1947 में जो लोग आये हैं वे भी भारतीय हैं। ममता ने कहा कि कई परिवार यहां पर 7 पुश्तें रहती हैं और सभी वैध दस्तावेज देने के बाद भी ऐसे लोगों लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने केंद्र पर सवाल उठाते हुये कहा है कि सरकार ने इन लोगों के लिये कोर्ट में आवाज क्यों नहीं उठाया है।

ममता बनर्जी ने कहा कि लोगों को एक गेम प्लान की तहत अलग-थलग किया जा रहा है। मुझे चिंता है कि लोगों को अपने ही देश में शरणार्थी बनाया जा रहा है। ममता ने कहा कि 40 लाख लोग जिन्हें ड्राफ्ट से बाहर किया गया है, वो कहां जाएंगे? अगर बांग्लादेश भी उन्हें वापस नहीं लेता तो उनका क्या होगा?

गौरतलब है कि असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का अंतिम मसौदा 2.89 करोड़ नामों के साथ सोमवार को जारी किया गया लेकिन इसमें 40 लाख लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। अंतिम मसौदे में कुल 3,29,91,384 आवेदकों में से 2,89,84,677 के नाम शामिल किए गए हैं लेकिन 40,07,707 आवेदकों के नाम छोड़ दिए गए हैं।

इस लिस्ट के आने के बाद से गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह मसौदा सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बनाया गया है. इसमें केंद्र या राज्य का लेना-देना नहीं है। उन्होंने भी यह भी कहा कि  “यह ड्राफ्ट सूची है, अंतिम सूची (फाइनल लिस्ट) नहीं। अगर किसी का नाम फाइनल लिस्ट में भी नहीं आता है, तो भी वह विदेशी न्यायाधिकरण में जा सकता है। किसी के भी विरुद्ध बलपूर्वक कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी, इसलिए किसी को भी घबराने की ज़रूरत नहीं है।”