नई दिल्ली | दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में शायद ही कोई ऐसा साल होता है जब कोई चुनाव न हो. ज्यादातर समय चुनाव होने की वजह से देश की अर्थव्यवस्था को काफी नुक्सान होता है. यही कारण है की प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार सभी चुनाव एक ही समय में कराने की सिफारिश की है. उनका कहना है की सभी विधानसभा और लोकसभा के चुनाव एक ही समय में होना चाहिए. हालाँकि चुनाव कब कराये जाए, यह चुनाव आयोग का विशेषाधिकार है.

चुनाव आयोग के पास यह अधिकार है की वो चाहे तो किसी भी चुनाव को अपने सुविधानुसार समय से पहले करवा सकता है. अगर मीडिया रिपोर्ट्स पर यकीन किया जाए तो इस बात की चर्चा जोरो पर है की अगले साल होने वाले कई राज्यों के विधानसभा चुनावो के साथ ही लोकसभा चुनाव कराये जाये. अगर ऐसा होता है तो मोदी सरकार को करीब छह महीने पहले ही चुनावो का सामना करना पड़ सकता है.

एक अंग्रेजी अख़बार के अनुसार फ़िलहाल इस बात की संभावनाओ पर विचार किया जा रहा है. कुछ ऐसे विधानसभा चुनाव भी जो 2019 में प्रस्तावित है उनको भी अगले साल ही कराने पर विचार हो रहा है. दरअसल अगले साल के अंत में चार राज्यों में विधानसभा चुनाव होने है. इनमे राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम शामिल है. इसके अलावा तेलंगाना, आंद्रप्रदेश और उड़ीसा राज्यों की विधानसभाओ का कार्यकाल अप्रैल 2019 में खत्म हो रहा है.

इसलिए इस बात की पूरी सम्भावना है की इन राज्यों के चुनाव भी अगले साल के अंत में करा दिए जाए. इस तरह करीब 7 राज्यों के विधानसभा एक समय में कराये जा सकते है. उधर चूँकि मोदी खुद इस बात को चर्चा में ला चुके है की विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक समय में ही होने चाहिए तो उम्मीद है की लोकसभा चुनावो को भी अगले साल विधानसभा चुनावो के साथ ही करा दिए जाए. वैसे भी कंपनी बार्कले इंडिया के अनुसार मोदी अपने बचे हुए कार्यकाल में शायद ही किसी बड़े सुधार का फैसला ले.

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