रविवार को कोटा में हुए अखिल ब्राह्मण महासभा के कार्यक्रम में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने ब्राह्मणों को सर्वश्रेष्ठ बताया। उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों को जन्म से ही समाज में उच्च स्थान मिल जाता है। इसकी वजह उनका समर्पण, त्याग और दूसरे समुदायों को मार्गदर्शन करना है।

बिरला के इस ट्वीट पर कांग्रेस नेताओं और कुछ सामाजिक संगठनों ने आपत्ति जताई है। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस ओबीसी विभाग के संयोजक राजेंद्र सैन ने कहा कि जाति के आधार पर कोई श्रेष्ठ अथवा कमजोर नहीं होता । जाति के बजाय अपने कर्मों से व्यक्ति श्रेष्ठ बनता है। खटीक समाज महिला मंच की अध्यक्ष चंद्रकांता मेघवाल ने एक बयान में कहा कि बिरला का यह बयान उचित नहीं है।

उनके इस बयान कि कांग्रेस नेता पीएल पुनिया ने भी आलोचना की है। पुनिया ने कहा- किसी भी व्यक्ति का आकलन उसके मेरिट के आधार पर किया जाना चाहिए। जबकि गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवानी ने स्पीकर बिड़ला की टिप्पणी को जाति प्रणाली का महिमामंडन करने वाला बताया है।

मेवानी ने लोकसभा स्पीकर से इस टिप्पणी के लिए माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि जातियों का महिमामंडन न सिर्फ निंदनीय है बल्कि अपराध भी है। कुछ लोग इस बात पर भी प्रश्न उठा रहे हैं कि क्या एक लोकसभा स्पीकर को किसी जाति विशेष के कार्यक्रमों में शिरकत करनी चाहिए और इसी प्रकार की बात कहनी चाहिए‌?

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