बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पीएम नरेंद्र मोदी के बयान पर तंज कसते हुए कहा कि ”पीएम कहते हैं, मां गंगा ने बुलाया है, लेकिन हम बनारस गए तो लोग कह रहे थे कि गंगा मां खोज रही थी, कहां गया मेरा बेटा.” याद रहे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 के आम चुनावों में काशी में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि मैं यहां खुद नहीं आया हूं, मुझे मां गंगा ने बुलाया है.

गंगा की अविरलता पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में उन्होंने कहा कि पटना के गंगा का पानी लोग घर में रखते थे. उस पानी के रंग में कोई बदलाव नहीं होता था. आज स्थिति वैसी नहीं है.  इसके साथ ही गंगा नदी में पानी का बहाव घटने और फरक्का बांध के कारण नदी में बढ़ते गाद पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गंभीर चिंता जताई.

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार बाढ़ के समय 32 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हुआ था. वहीं फरक्का सिर्फ 24 लाख क्यूसेक डिस्चार्ज करता है. बाकी पानी चारों ओर फैला. इसका परिणाम हुआ कि बहुत दिनों तक बाढ़ की समस्या को बिहार ने झेला. आंख के सामने बाढ़ आ रही है. पानी घुस रहा है. कभी बख्तियारपुर में पानी नहीं आता था, जो इस बार आया. फरक्का से न सिर्फ बिहार बल्कि पश्चिम बंगाल को भी परेशानी हो रही है. उन्होंने यह भी कहा कि हुगली में सिल्टेशन की बात हो रही है. आज के दौर में रिवर राइन पोर्ट की आवश्यकता नहीं है.

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राष्ट्रीय जलमार्ग योजना पर मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा में बराज की कई शृंखलाएं बनेंगी. हमने केंद्रीय मंत्री गडकरी का बयान देखा है. ऐसा हुआ तो गंगा की अविरलता खत्म हो जाएगी. गंगा नदी बड़े-बड़े तालाब में परिवर्तित हो जाएगी. हमलोग इसे स्वीकार नहीं कर सकते हैं। गंगा का संबंध सिर्फ बिहार से नहीं, बल्कि पूरे देश से है. मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में गंगा प्रवेश करती है तो 400 क्यूसेक पानी रहता है. बांग्लादेश से करार है देश से 1500 क्यूसेक पानी आगे जाना चाहिए. यह बिहार का ही पानी है जो बांग्लादेश जाता है. बिहार को पानी के उपयोग पर पाबंदी है. बाढ़ हम झेलें और पानी का उपयोग आप करें.

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