पश्चिम बंगाल के बाद अब पंजाब और केरल ने भी नागरिकता संशोधन विधेयक (कैब) का विरोध शुरू कर दिया है। केरल के मुख्यमंत्री पिनारई विजयन ने नागरिकता बिल का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार भारत को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश कर रही है।

नागरिकता संशोधन बिल (CAB) को विजयन ने संविधान के खिलाफ बताया है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस बिल को केरल में लागू नहीं होने दिया जाएगा। विजयन ने कहा, भारत का संविधान सभी भारतीयों के लिए नागरिकता के अधिकार की गारंटी देता है, चाहे उनका धर्म, जाति, भाषा, संस्कृति, लिंग या पेशा कुछ भी हो। नागरिकता संशोधन विधेयक लोगों के अधिकार को खत्म करता है। धर्म के आधार पर किसी की नागरिकता तय करने का अर्थ है संविधान को नकारना।

मुख्यमंत्री विजयन ने कहा, इस विधेयक से लोगों को सांप्रदायिक आधार पर बांटने की कोशिश हो रही है. हमारी धर्मनिरपेक्ष एकता को समाप्त करने वाला यह विधेयक लोकसभा में काफी हड़बड़ी में पारित कराया गया। बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के मुसलमानों को इससे अलग रखा गया है। धर्म के आधार पर किया गया यह भेदभाव प्राकृतिक न्याय से लोगों को वंचित रखना है।

विजयन ने कहा, इस विधेयक में कहा गया है कि तीन पड़ोसी देशों के 6 धर्म के लोगों को नागरिकता दी जाएगी। इस क्लॉज को हटाया जाना चाहिए। ऐसा नहीं है कि संघ (आरएसएस) को यह जानकारी नहीं होगी कि भारत में श्रीलंका और उन तीन देशों के शरणार्थी भी रहते हैं। संशोधन विधेयक संघ परिवार की योजनाओं को पूरा करने वाला है ताकि गैर-धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र का निर्माण किया जा सके। भारत में हर तरह के लोग रहते हैं। इन तथ्यों को दरकिनार करने का मतलब है देश को पीछे धकेलना।

वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि वह नागरिकता संशोधन विधेयक को अपने राज्य में लागू नहीं होने देंगे। उनका कहना है कि यह विधेयक भारत के धर्मनिरपेक्ष चरित्र पर सीधा हमला है।

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