नई दिल्ली । चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका दिया है। लाभ के पद के एक मामले में चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी है। फ़िलहाल आयोग ने रिपोर्ट बनकर राष्ट्रपति के पास अपनी सिफ़ारिश भेज दी है। आगे राष्ट्रपति को फ़ैसला करना है की आयोग की सिफ़ारिश को माने या नही। इसी बीच इस मामले में विपक्षी दलो की भी प्रतिक्रियाए आयी है।

भाजपा और कांग्रेस ने चुनाव आयोग के फ़ैसले पर ख़ुशी जताते हुए कहा की नैतिक तौर पर केजरीवाल को इस्तीफ़ा देना चाहिए। उधर आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग पर ही सवाल उठाते हुए चुनाव आयुक्त एके ज्योति को ही कठघरे में खड़ा कर दिया। आप ने अपने अधिकारिक बयान में कहा की ज्योति जी ने रिटायरमेंट से पहले मोदी जो गिफ़्ट दिया है। बता दे की ज्योति जी गुजरात की मोदी सरकार में प्रधान सचिव रह चुके है।

इसी बीच केजरीवाल ने इस पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी थी। लेकिन अब उन्होंने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने ट्वीट कर कहा,’ जब आप सच्चाई और ईमानदारी पर चलते हैं तो बहुत बाधाएँ आती हैं। ऐसा होना स्वाभाविक है। पर ब्रह्मांड की सारी दृश्य और अदृश्य शक्तियाँ आपकी मदद करती हैं। ईश्वर आपका साथ देता है। क्योंकि आप अपने लिए नहीं,देश और समाज के लिए काम करते हैं। इतिहास गवाह है कि जीत अंत में सचाई की होती है।’

मालूम हो की मार्च 2015 में केजरीवाल सरकार ने 21 विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त किया था। हालाँकि दिल्ली में केवल मुख्यमंत्री का एक संसदीय सचिव बन सकता है जबकि केजरीवाल सरकार ने हर मंत्री के साथ 3 संसदीय सचिव नियुक्त किए। केजरीवाल सरकार के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ वक़ील प्रशांत पटेल ने राष्ट्रपति के यहाँ शिकायत दर्ज की जिसको राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग के पास भेज दिया।

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