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हैदराबाद: तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर ने गुरुवार यानी छह सितंबर को सुबह बुलाई मंत्रिमंडल की बैठक बुलाकर विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव पारित कर दिया। इस प्रस्ताव को राज्यपाल ईएसएल नरसिंहन ने मंजूरी दे दी है।

राज्यपाल ने नई सरकार का गठन होने तक चंद्रशेखर राव से कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में पद पर बने रहने का आग्रह किया है। फिलहाल चुनाव तक के चंद्रशेखर राव कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहेंगे। बता दें कि तेलंगाना में तेलंगाना राष्ट्रीय समिति (टीआरएस )सरकार का कार्यकाल  मई 2019 तक का है।

लेकिन माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव से पहले केसीआर विधानसभा चुनाव कराना चाहते है। केसीआर राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के साथ चुनाव कराना चाहते है। ताकि इसका फायदा उन्हे लोकसभा चुनाव में भी मिले। बता दें कि तेलंगाना में विधानसभा की कुल 119 सीटें हैं। इसमें सत्ताधारी टीआरएस के पास विधानसभा में अभी 90 सीटें हैं। जबकि विपक्षी कांग्रेस के पास 13 सीटें और बीजेपी के पास 5 सीटें हैं।

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बताया जा रहा कि टीआरएस ने चुनाव प्रचार की तैयारियां भी कर ली है। टीआरएस 25 लाख लोगों की एक बड़ी रैली करने वाली है। जिसके लिए दो हजार एकड़ की जमीन की भी पहचान कर ली गई है, ये रंगा रेड्डी जिले में होगी।

इस मामले में काँग्रेस का कहना है कि राव ने यह कदम राज्य की जनता को गुमराह करने और अपनी नाकामियां छिपाने के लिए उठाया है। तेलंगाना प्रभारी रामचंद्र खूंटिया ने कहा, ‘केसीआर ने कहा कि कांग्रेस चुनाव से डरी हुई है। ऐसा नहीं है। हम चुनाव से डरे नहीं हैं। हम चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हम लड़ेंगे और जीतेंगे।’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘ राज्य में कोई प्राकृतिक आपदा नहीं थी, सरकार भी अस्थिर नहीं थी। इसके बावजूद विधानसभा भंग की गई। यह अलोकतांत्रिक कदम है। यह जनता को गुमराह करने के लिए किया गया।’

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