Monday, July 26, 2021

 

 

 

राज्यपाल से मिलकर बोले कमलनाथ – हमारे पास तो है बहुमत, बीजेपी चाहे तो लाए अविश्वास प्रस्ताव

- Advertisement -
- Advertisement -

भोपाल: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोमवार रात को राज्यपाल लालजी टंडन से राजभवन में मुलाकात के बाद बहुमत होने का दावा करते हुए कहा कि हमारे पास जब नंबर है तो फ्लोर टेस्ट का सवाल ही कहां उठता है। हां, बीजेपी चाहे तो अविश्वास प्रस्ताव जरूर ला दे।

राज्यपाल से मुलाकात के बाद राजभवन के बाहर कमलनाथ ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैंने राज्यपाल को बजट सत्र के शुरुआती दिन उनके अभिभाषण के लिए धन्यवाद दिया। आज हम बहुमत में हैं इसलिये शक्ति परीक्षण कराने का सवाल पैदा नहीं होता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जो यह दावा कर रहे हैं कि हमारे पास बहुमत नहीं है तो उन्हें मेरी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहिए और शक्ति परीक्षण कराना चाहिए।’’

वहीं दूसरी तरफ बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटा दिया है। जल्द फ्लोर टेस्ट की मांग वाली शिवराज सिंह चौहान की याचिका पर 17 मार्च को ही सुनवाई होनी है। बता दें कि राज्यपाल लालजी टंडन ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को सोमवार को सत्र के पहले दिन ही बहुमत साबित करने का निर्देश दिया था। इसे टालने के लिए कमलनाथ सरकार ने कोरोना वायरस को हथियार बनाया और स्पीकर ने 26 मार्च तक के लिए विधानसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी। इसके बाद राज्यपाल ने कड़ी भाषा में कमलनाथ को एक और चिट्ठी लिखी। सोमवार को फ्लोर टेस्ट न होने पर नाराजगी जताते हुए उन्हें 17 मार्च को बहुमत साबित करने का निर्देश दिया।

राज्यपाल लालजी टंडन ने सोमवार को कमलनाथ को लिखे पत्र में कहा, मेरे पत्र के जवाब में आपका पत्र मिला। धन्यवाद। मुझे खेद है कि आपके पत्र का भाव और भाषा संसदीय मर्यादाओं के अनुकूल नहीं है। मैंने आपको विश्वास मत प्राप्त करने को कहा था, लेकिन आपके द्वारा ऐसा नहीं किया गया और न इस संबंध में सार्थक प्रयास किया गया। सदन की कार्यवाही 26 मार्च तक स्थगित हो गई।  पत्र में राज्यपाल ने आगे लिखा है, यह खेद की बात है कि आपने मेरे द्वारा दी गई समयावधि में बहुमत सिद्ध करने की जगह, पत्र लिखकर विधानसभा में शक्ति परीक्षण कराने में असमर्थता व्यक्त की/आनाकानी की, जिसका कोई औचित्य और आधार नहीं है। आपने अपने पत्र में शक्ति परीक्षण नहीं कराने के जो कारण लिए हैं, वे आधारहीन तथा अर्थहीन हैं।

राज्यपाल ने कहा, आपने पत्र में सर्वोच्च न्यायालय के जिस निर्णय का जिक्र किया है वह वर्तमान परिस्थितियों और तथ्यों में लागू नहीं होता। जब यह प्रश्न उठे कि किसी सरकार को सदन का विश्वास है या नहीं, तब सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कई निर्णयों में निर्विवाद रूप से स्थापित किया गया है कि इस प्रश्न का उत्तर सदन में शक्ति परीक्षण के से ही हो सकता है, राज्यपाल ने अंत में लिखा है, आपसे पुन: निवेदन है कि सांविधानिक एवं लोकतंत्रीय मान्यताओं का सम्मान करते हुए 17 मार्च तक बहुमत सिद्ध करें, अन्यथा माना जाएगा कि वास्तव में आपको विधानसभा में बहुमत प्राप्त नहीं है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles