हार्वर्ड विश्वविद्यालय में नौकरी की पेशकश के बाद NDTV को अलविदा कहने वाली एंकर निधि राजदान ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि वह फिशिंग की शिकार हुई हैं और उनके पास हार्वर्ड से कोई ऑफर आया ही नहीं था।

उन्होने ट्वीट किया, ‘यूनिवर्सिटी का पक्ष जानने के बाद मुझे पता चला कि मैं एक काफी सफिस्टकेटिड फिशिंग की शिकार हुई हूं और मेरे पास हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से उनके जर्नलिज़्म डिपार्टमेंट की फैकल्टी बनने का कोई ऑफर आया ही नहीं था। मैंने पुलिस से इस संबंध में शिकायत की है और सभी संबंधित दस्तावेज उपलब्ध करवा दिए हैं। मैंने पुलिस से आग्रह किया है कि यह फ्रॉड करने वालों की जल्द से जल्द पहचान की जाए। इसके साथ ही मैंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के अधिकारियों से भी अपील की है कि वे इस मामले को गंभीरता से लें।’

बता दें कि पिछले साल निधि राजदान ने सोशल मीडिया पर ही बताया था कि उन्हें हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से एसोसिएट प्रोफेसर की जॉब का ऑफर आया है और वह NDTV की नौकरी छोड़कर इस असाइनमेंट को ले रही हैं। हालांकि, अब पता चला है कि ऐसा कोई ऑफर उन्हें हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की तरफ से आया ही नहीं था बल्कि वह फिशिंग की शिकार हुई हैं।

निधि राजदान की ओर से जारी बयान के मुताबिक, उन्हें पहले बताया गया था कि सितंबर 2020 से उनकी नौकरी शुरू होने वाली थी, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से अब उनकी क्लासेज जनवरी, 2021 से शुरू होंगी। निधि राजदान का दावा है कि इसके बाद उन्होंने कई तरह की प्रशासनिक विसंगतियाँ उन प्रक्रियाओं को लेकर नोटिस की, जिसके बारे में उन्हें बताया गया था।

उन्होंने लिखा है, “पहले तो मैंने इन विसंगतियों को महामारी की वजह से अपनाए गए नए मापदंडों के मद्देनज़र नज़रअंदाज़ किया, लेकिन हाल ही में मुझे इसमें ज्यादा ही गड़बड़ियाँ नज़र आई। इसके बाद मैंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ अधिकारियों से इस बाबत संपर्क साधा। उनके कहने पर मैंने उनसे उन सभी जानकारियाँ को शेयर किया जो मुझे लगता था कि यूनिवर्सिटी की ओर से भेजी गई है।”

उन्होंने लिखा है, “यूनिवर्सिटी की ओर से मिली जानकारी के आधार पर मुझे यह पता चला कि मैं एक सुव्यवस्थित तरीके से किए गए फिशिंग हमले का शिकार हुई हूँ। वास्तव में मुझे हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से पत्रकारिता के एसोसिएट प्रोफेसर की नौकरी की पेशकश नहीं हुई थी। मेरे साथ हुए इस फिशिंग हमले में साजिशकर्ताओं ने मेरे व्यक्तिगत डाटा, कम्यूनिकेशन, डिवाइस और सोशल मीडिया अकाउंट तक पहुँचकर उससे हासिल जानकारियों का इस्तेमाल किया है।”