Wednesday, October 27, 2021

 

 

 

चिदंबरम ने कहा, ‘JNU छात्रों के ख़िलाफ़ देशद्रोह का केस कमज़ोर’

- Advertisement -
- Advertisement -

पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि जेएनयू छात्रों के ख़िलाफ़ ‘देशद्रोह’ संबंधी केंद्र सरकार का केस कमज़ोर है। चिदंबरम ने कहा कि इस संबंध में क़ानून की जानकारी रखने वाला कोई भी वकील जानता होगा कि ये देशद्रोह नहीं है।

चिदंबरम ने ‘द हिंदू’ अख़बार को दिए इंटरव्यू में कहा कि ये पूरी तरह “संभव है कि वहां कुछ छात्र हैं जो माओवादी आंदोलन से सहानुभूति रखते हैं लेकिन जब तक हिंसा को उकसावा देने के लिए कुछ नहीं किया जाता ये देशद्रोह नहीं है।”

चिदंबरम ने कहा, “पाकिस्तान ज़िंदाबाद आदि नारे हर दिन कश्मीर में सुने जाते हैं। खालिस्तान का नारा हर हफ्ते पंजाब में सुना जाता है। तमिलनाडु में ऐसे लोग है जो LTTE की प्रशंसा करते हैं, यहां तक कि उसके कैडर का महिमामंडन करते हैं जो पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के ज़िम्मेदार रहे हैं। ऐसी हरकतें साफ तौर पर स्वीकार्य है। लेकिन क्या इनमें देशद्रोह जैसी सज़ा दी जा सकती है। अब सवाल ये है कि यहां कौन सा क़ानून सा बनता है, ये इस बात पर निर्भर करता है कि किस तरह का उकसावा किया गया। सही में कौन से शब्द बोले गए। जगह और वक्त का संदर्भ जहां ये सब हुआ। इस बारे में क़ानून की जानकारी रखने वाला कोई भी वकील जानता होगा कि ये देशद्रोह नहीं है।”

चिदंबरम ने कहा कि ‘आज भी मैं देख रहा हूं कि पुलिस कमिश्नर कन्हैया कुमार के ख़िलाफ देशद्रोह की बिनाह पर ही चार्जशीट का बचाव कर रहे हैं। साफ है कि कन्हैया ने उस दिन जो भी कहा था वो देशद्रोह का मामला नहीं है। हक़ीक़त तो ये है, मैं समझता हूं कि उसका भाषण किसी भी क़ानून को आमंत्रित नहीं करता।’

चिदंबरम ने कहा कि वो जम्मू कश्मीर से आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर एक्ट हटाने के पक्ष में हैं लेकिन नहीं समझते कि मौजूदा सरकार के रहते ऐसा होगा। (News24)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles