कोलकाता में शहादत-ए-बाबरी मस्जिद पर बोलते हुए तृणमूल कांग्रेस की नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 25 साल पहले जो शुरू हुआ था, वो आज भी जारी है. उन्होंने कहा, लोगों के बीच फूट पैदा करने वाले देश के सच्चे नेता नहीं हो सकते हैं.

बनर्जी ने कहा, जो सबको साथ लेकर आगे बढ़ता है, उसे नेता कहते हैं , लेकिन जो देश को बांटे वह कभी भी नेता नहीं हो सकता, भले ही अकेले देश का नेतृत्व करे. लोग उन्हें याद भी नहीं रखते. हिंदुत्व की भावना एकता पर आधारित है जो सबों को साथ लेकर चलती है. यह विभाजन की सीख नहीं देती. हम उन लोगो से सहमत नहीं है जो अपने हिसाब से धर्म की परिभाषा गढ़ते हैं. हिंदुत्व तो अन्य धर्माें के लोगों से भी प्रेम करने की सीख देती है.

मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप पर उन्होंने कहा, हमारे यहां 30 तरह के अल्पसंख्यक लोग रहते हैं. वे लोग इस देश के नागरिक हैं और मुझे इस बात की परवाह नहीं की, मुझ पर क्या आरोप लगाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक का मतलब केवल मुसलमान नहीं होता.

उन्होंने आगे कहा, मैं दुर्गा पूजा में चंडीपाठ करती हूं. इफ्तार पार्टी में भी जाती हूं. मुझे तो कोई गलत नहीं कहता, क्योंकि मैं सबको साथ लेकर चलने में यकीन करती हूं. इस दौरान सीएम ने अल्पसंख्यक समुदाय के विकास के लिए किये गये कार्यों का ब्योरा दिया.

ममता ने बताया, मेरे आने के पहले तक इस विभाग के पास जो फंड था, उसे मैंने आठ गुणा बढ़ा दिया है. इसका फायदा उक्त समुदाय को मिल रहा है. विभागीय वजीफा लेकर लोग डब्ल्यूबीसीएस, डॉक्टर और इंजीनियर बन रहे हैं. यह सब तृणममूल सरकार के आने के बाद ही हुआ है. पहले की सरकार ने 40 हजार करोड़ की देनदारी कर रखी थी. हमलोगों ने कर्ज चुकाया.

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार जानबुझ कर विभेद फैला रही है. अल्पसंख्यक समुदाय को पैसा नही‍ं देना पड़े इसके लिये तरह तरह का बहाना भी बना रही है. वामो सरकार की उधारी चुकाने के बाद हमने कुछ बेहतर करना चाहा तो केंद्र ने अल्पसंख्यक समुदाय को दिया जाने वाला वजीफा भी रोक दिया. इसके बावजूद हमलोग अपने प्रयास से बच्चों को वजीफा दे रहे हैं.

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