नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला ने शुक्रवार को कहा कि भारत ने येरुशलम को इज़रायल की राजधानी की मान्यता देने की अमेरिका की घोषणा के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव के पक्ष में मतदान कर फलस्तीन पर अपना स्वतंत्र रुख कायम रखा.

अब्दुल्ला ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करने वाले 128 देशों का आभारजताते हुए कहा कि भारत के प्रस्ताव का समर्थन करने से फलस्तीन को लेकर उसका सुविचारित, सैद्धांतिक और स्वतंत्र रुख कायम रहा.

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उन्होंने एक बयान में कहा, ‘मैं प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करने वाले सभी देशों का शुक्रिया अदा करता हूं. येरुशलम को इज़रायल की राजधानी की मान्यता देने का अमेरिका का फैसला मनमाना, गलत और बेबुनियाद है जिसने इतिहास एवं न्याय के सिद्धांतों को चुनौती दी.’

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘भारत ने दूसरे देशों के साथ प्रस्ताव के पक्ष में मतदान कर फलस्तीन को लेकर अपना सुविचारित एवं सैद्धांतिक रुख कायम रखा.’ उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया की शांति एवं स्थिरता को बाधित करने वाले और फलस्तीन के लोगों को उनके अधिकारों से वंचित करने वाले इस तरह के किसी भी कदम को मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए.

श्रीनगर के सांसद ने कहा, ‘भारत पारंपरिक रूप से एवं हमेशा से पूर्वी येरुशलम को फलस्तीन की राजधानी मानता रहा है और संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव को उसके समर्थन से उस रूख एवं प्रतिबद्धता की पुष्टि होती है.’ (भाषा)

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