Tuesday, July 27, 2021

 

 

 

अमेरिकी एक्सपर्ट से बोले राहुल गांधी – हिंदुओं, मुस्लिम और सिखों को बांटने वालों ने खुद को राष्ट्रवादी घोषित किया

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को अमेरिका के पूर्व राजनयिक निकोलस बर्न्स के साथ वीडियो कांफ्रेंस के जरिए संवाद किया। इस दौरान उन्होने कहा कि अमेरिका में अफ्रीकी-अमेरिकियों एवं अन्य लोगों तथा भारत में हिंदुओं, मुसलमानों और सिखों को बांट कर देश की बुनियाद कमजोर करने वाले खुद को राष्ट्रवादी कहते हैं।

गांधी ने अमेरिका में ‘ब्लैक लाइव्ज मैटर’ आंदोलन की पृष्ठभूमि में कहा, ‘मुझे लगता है कि हम एक जैसे इसलिए हैं, क्योंकि हम सहिष्णु हैं। हम बहुत सहिष्णु राष्ट्र हैं। हमारा डीएनए सहनशील माना जाता है। हम नए विचारों को स्वीकार करने वाले हैं। हम खुले विचारों वाले हैं, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि वो अब गायब हो रहा है। यह काफी दु:खद है कि मैं अब उस स्तर की सहिष्णुता को नहीं देखता, जो मैं पहले देखता था। ये दोनों ही देशों में नहीं दिख रही।’

उन्होंने यह भी कहा, ‘मैं सौ प्रतिशत आशान्वित हूं, क्योंकि मैं अपने देश के डीएनए को समझता हूं। मैं जानता हूं कि हजारों वर्षों से मेरे देश का डीएनए एक प्रकार का है और इसे बदला नहीं जा सकता। हां, हम एक खराब दौर से गुजर रहे हैं। मैं कोविड के बाद नए विचारों और नए तरीकों को उभरते हुए देख रहा हूं। मैं लोगों को पहले की तुलना में एक-दूसरे का बहुत अधिक सहयोग करते हुए देख सकता हूं।’

वहीं निकोलस बर्न्स ने कहा, अमेरिका में इस तरह की परेशानियां हैं, अफ्रीकी-अमेरिकियों के साथ लंबे वक्त से ऐसा होता रहा है। अमेरिका में मार्टन लूथर किंग ने बड़ा काम किया है, उनके आदर्श भी महात्मा गांधी थे। अमेरिका ने बराक ओबामा जैसे नेता को राष्ट्रपति चुना लेकिन आज क्या देखने को मिल रहा है। किसी का भी हक है, प्रदर्शन करना लेकिन अमेरिका में राष्ट्रपति ब्लैक लोगों को आतंकवादी समझते हैं।

उन्होने कहा, आज अमेरिका के लगभग हर शहर में इस तरह का प्रदर्शन हो रहा है, जो लोकतंत्र के लिए मायने रखता है। अगर हम चीन जैसे देश को देखते हैं, तो हम काफी बेहतर हैं। भारत में भी यही है वहां भी लोकतंत्र है और लंबे संघर्ष के बाद आजादी मिली है। हमें उम्मीद है कि अमेरिका का लोकतंत्र फिर मजबूत होगा।

निकोलस बर्न्स ने बताया, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लगता है कि वह सबकुछ ठीक कर सकते हैं। लेकिन अमेरिका में सेना के लोगों ने साफ कर दिया है कि वे स्वयं के नागरिकों के खिलाफ सड़क पर नहीं उतरेंगे। उनका कहना है कि वह संविधान को सर्वोपरि मानते हुए चलेंगे न कि राष्ट्रपति के हिसाब से। अमेरिकी नागरिकों को प्रदर्शन करने का हक है, लेकिन सत्ताधारी लोग लोकतंत्र को चुनौती देने में लगे हुए हैं। चीन और रूस जैसे देशों में अभी भी अधिनायकवाद हो रहा है।

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