जरा-जरा सी बात पर देश के मुसलमानों को ‘पाकिस्तान जाने’ के बारे में कहने वाले लोगों को एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने लोग ऐसा कहते हैं, उन्हें नहीं पता कि पाकिस्तान और हिन्दुस्तान के नागरिकों का दिल एक जैसा धड़कता है।

पवार ने बताया कि बतौर  ICC अध्यक्ष उन्होंने कई बार पाकिस्तान का दौरा किया और हर बार उन्हें महसूस हुआ कि पाकिस्तान के लोगों के दिल में भारतीयों को लेकर सम्मान और प्रेम है। इसके उलट पाकिस्तानी फौज और सत्ताधारी मजबूरी में भारत से विवाद और फौजी आक्रमण में उलझते हैं। दरअसल, उन्हें भी पाकिस्तान की अवाम पर राज करना है।

शरद पवार पुणे में सीनियर जर्नलिस्ट संजय आवटे की किताब ‘वी द चेंज’ के लॉन्चिंग प्रोग्राम में पहुंचे पवार ने कहा, ‘जब अल्पसंख्यक समुदाय का कोई व्यक्ति अपनी राय जाहिर करता है और अगर वह राय कुछ लोगों को पसंद नहीं आती है, तो उस व्यक्ति से पाकिस्तान जाने के लिए कहा जाता है। उससे कहा जाता है कि उसे इस देश में रहने का कोई हक नहीं है। ऐसा कहने वाले लोग न तो पाकिस्तान को समझते हैं और न ही अपने देश भारत को।’

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उन्होंने कहा कि पाकिस्तान क्या है? विभाजन से पहले यह भारत का हिस्सा था। जो लोग उस वक्त थे, सभी भारतीय थे उस वक्त। मगर विभाजन के दौरान दोनों तरफ के लोग इधर-उधर गये। उन्‍होंने कहा कि इस तरह की बातों से वैमनस्‍यता को बढ़ावा मिलता है। इसलिए सभी को चाहिए इस तरह की बात करने के बाद अपनी जुबान पर लगाम लगाएं।

असम राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) विवाद पर पवार ने कहा, ‘हमारी सरकार के समय में भी हमने कई लोगों को बांग्लादेश वापस भेजा था, लेकिन इसके लिए पहले हमने बांग्लादेश की सरकार से बात की। उसके बाद ही लोगों को वापस भेजा गया।’

शरद पवार ने कहा, ‘एनआरसी डेटा के मुताबिक कुल 40 लाख लोग हैं, जिनका नाम लिस्ट में नहीं है। इन लोगों को सरकार कहां भेजेगी। जरूरत पड़े तो इस मसले को अंतराष्ट्रीय स्तर पर ले जाकर इसका हल निकालने की कोशिश की जानी चाहिए।

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