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तीन तलाक विधेयक में कमियां गिनाते हुए कांग्रेस की सांसद सुष्मिता देव ने गुरुवार को बिल में महिलाओं की सुरक्षा के लिए जरूरी प्रावधान नहीं किए गए हैं.

असम के सिलचर से सांसद सुष्मिता देव ने कहा, अगर लोकसभा में और अधिक महिला सांसद होतीं तो सरकार द्वारा लाया गया ‘त्रुटिपूर्ण विधेयक’ कभी पास नहीं होता. उन्होंने सवाल उठाया, प्रस्तावित कानून तलाक को एक क्रिमिनल ऑफेन्स बना देगा और तलाक देने वाले पुरुष को तत्काल प्रभाव से जेल भेज देगा. ऐसी स्थिति में महिलाओं को मिलने वाले गुजारा भत्ता पर गंभीर खतरा है.

उन्होंने कहा, केन्द्र सरकार यदि मुस्लिम महिलाओं के हित में कोई कदम उठाना चाहती है तो उसे ट्रिपल तलाक का शिकार हो रही महिलाओं के लिए एक कॉर्पस फंड तैयार करना चाहिए. क्योंकि प्रस्तावित कानून महज तीन बार तलाक का इस्तेमाल करने पर उस व्यक्ति को दोषी करार देता है और उसे जेल भेज दिया जाता है. लिहाजा, क्या कानून यह सुनिश्चित करेगा कि पुरुष को जेल भेज देने के बाद तलाक से पीड़ित महिला और परिवार को गुजारा भत्ता देने का क्या तरीका होगा.

सुष्मिता ने दलील दी कि केन्द्र सरकार का प्रस्तावित कानून इस मुद्दे पर चुप है. लेकिन क्या केन्द्र सरकार का यह मानना है कि महज तलाक बोलने के बाद यदि व्यक्ति को जेल भेज दिया जाता है को वह जेल जाने के बावजूद महिला और बच्चों के गुजारा भत्ते का इंतजाम करेगा.

सुष्मिता देव ने केन्द्र सरकार से पूछा कि क्या ट्रिपल तलाक पर उसका प्रस्तावित कानून पहले से अलग-थलग पड़े मुस्लिम समाज को मुख्यधारा से और अलग नहीं कर देगा?

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