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आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद के दिलसुखनगर ब्लास्ट मामले में आए अदालत के फैसले को लेकर एनआईए की कार्यविधि पर सवाल उठाते हुए कहा कि तनी ही तेजी से मक्का-मस्जिद ब्लास्ट, समझौता ब्लास्ट या बाबरी मस्जिद केस की सुनवाई क्यों नहीं की जाती.

ओवैसी ने सवाल किया, ‘‘हमारी प्रमुख जांच एजेंसियां सभी कथित आतंकवादी मामलों, 1992 से ही लंबित बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में दोषी करार दिलवाने के लिए ऐसी ही जल्दबाजी क्यों नहीं दिखातीं ?’’

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ओवैसी ने कहा कि दिलसुख नगर ब्लास्ट में जिस तरह से अधिकारियों ने दिलचस्पी दिखाई, उससे तीन साल में रिजल्ट आ गया. हम ये बोल रहे हैं कि मक्का-मस्जिद ब्लास्ट या मालेगांव ब्लास्ट में एऩआईए क्यों नहीं दिलचस्पी दिखा रहा है.  स्वामी असीमानंद को बेल होने पर एनआईए अपील नहीं करता.

ओवैसी ने सवाल किया कि क्या एनआईए मक्का मस्जिद धमाके, अजमेर दरगाह धमाके और मालेगांव बम धमाके के मामलों में आरोपियों को ‘‘दोषी करार कर पाएगी ?’’ ओवैसी ने ट्वीट कर कहा, ‘‘2013 के दिलसुखनगर धमाका मामले के सभी आरोपियों को दोषी ठहराया गया. क्या एनआईए मक्का मस्जिद धमाके, अजमेर दरगाह धमाके, मालेगांव धमाके के मामलों में दोषी करार दिलाएगी ?’’

ओवैसी ने आगे कहा, ‘‘दिलसुखनगर धमाका मामले में अदालत ने एक ऐसा फैसला दिया है जिसे निश्चित तौर पर स्वीकार किया जाना चाहिए और आतंकवादियों को सजा दी जानी चाहिए

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