कोहराम न्यूज़ डेस्क – मीडिया चैनलों से लेकर सोशल मीडिया तक में जिस तरह दो धर्मों को लेकर चर्चाएँ की जाती है उससे जितना फायदा नेताओं को उठाना था उन्होंने उठा लिया है या फिर यह कहें की भारत की जनता इन विवादों से अब पूरी तरह पक चुकी है क्यों की धर्मों को लेकर जितना अधिक नकारात्मक दिखाया जा रहा है अब उसके बाद छोटी मोटी बातों से देश की जनता पर कोई असर पड़ता दिखाई नही दे रहा है. शायद यही कारण है की प्रधानमंत्री मोदी तक की शमशान और कब्रिस्तान वाली बात को सिर्फ मीडिया ही उछालने में लगी है वरन लोगो में  इस बात की कोई चर्चा तक नही है.

यह कहें की जनता जागरूक हो रही है वो अब पार्टी से अधिक उम्मीदवार को देख रही है यही कारण है की लोकसभा चुनाव में जहाँ कांग्रेस तथा अन्य पार्टियाँ छोड़कर बीजेपी में गये लोग अधिकतर संख्या में चुनाव जीते थे.

मुंबई निकाय चुनावों में भी दो कैंडिडेट ऐसे ही जीते जहाँ लोगो ने उनकी पार्टी से अधिक को तवज्जो दी. वार्ड नंबर 96 से अपनी किस्मत अजमा रहे शिवसेना उम्मीदवार मोहम्मद हलीम खान को लोगो ने खूब सराहा तथा शिवसेना की हिंदूवादी छवि के विपरीत मुस्लिम प्रत्याशी हाजी मोहम्मद हालिम खान की जीत हुई.

वहीँ दूसरी तरफ पुणे असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने गुरुवार को यरवदा के वार्ड नंबर 6 से जीत दर्ज की। एआईएमआईएम ने पुणे नगर निगम चुनावों (पीएमसी) में पहली बार खाता खोला एआईएमआईएम शहर इकाई के अध्यक्ष अंजुम इनामदार ने बताया कि लांडगे ने कांग्रेस की अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी संगाती देवकर को 900 से अधिक मतों से हराया। उन्होंने कहा, “हमारे अधिकांश उम्मीदवारों ने अच्छा प्रदर्शन किया। हालांकि हम यरवदा से बेहतर की उम्मीद कर रहे थे।” बता दें कि लांडगे एक गृहिणी हैं और एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जरूरतमंद लोगों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराती हैं।


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