Saturday, July 24, 2021

 

 

 

अमित शाह के उलट हेमंत बिस्वा बोले – सीएए के तहत धार्मिक उत्पीड़न कोई शर्त नहीं

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नागरिकता संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान दिये गए देश के गृहमंत्री अमित शाह के बयान के उलट असम के वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को कहा कि नागिरकता संशोधन ऐक्ट के तहत नागरिकता के लिए धार्मिक उत्पीड़न शर्त नहीं है।

बता दें कि अमित शाह ने कहा था कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का आधार धार्मिक उत्पीड़न है। यानी जो अल्पसंख्यक वहां धार्मिक उत्पीड़न का शिकार हुए हैं सिर्फ उन्हें ही भारत की नागरिकता दी जाएगी।

अमित शाह के बयान के उलट अब सरमा ने कहा कि सीएए के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करने के तीन मापदंड हैं। इनमें से पहला है कि आवेदक हिंदू, जैन, पारसी, ईसाई, सिख या बौद्ध हो। दूसरा, आवेदक मूल रूप से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान का रहने वाला हो और तीसरा यह कि उसके पास 31 दिसंबर 2014 के पहले से भारत में रहने का प्रूफ हो। उन्होंने कहा कि इसके अलावा धार्मिक उत्पीड़न नागरिकता के लिए कोई मापदंड नहीं है।

बिस्वा ने सवाल उठाते हुए कहा कि ‘कोई अपीलकर्ता यह कैसे साबित करेगा कि वो धार्मिक प्रताड़ना का शिकार हुआ है? या वो यह कैसे साबित करेगा कि वो धार्मिक प्रताड़ना का शिकार होकर ही भारत में आया है।?’ उन्होने कहा कि ‘यह किसी भी इंसान के लिए असंभव है कि वो बांग्लादेश जाए और धार्मिक प्रताड़ना के खिलाफ थाने में दर्ज कराई गई अपनी शिकायत का कोई प्रमाण पत्र लेकर आए।’

उन्होंने आगे कहा कि ‘अगर किसी इंसान को यह साबित करना है कि वो धार्मिक प्रताड़ना का शिकार हुआ है तो उसे थाने में दर्ज कराई गई शिकायत की कॉपी लाने के लिए वापस बांग्लादेश जाना होगा…बांग्लादेश का वो पुलिस स्टेशन उसे एफआईआर की कॉपी क्यों देगा? इसलिए मैंने यह कहा कि नागरिकता संशोधन कानून के तहत किसी के लिए यह साबित करना नामुमकिन है कि वो धार्मिक प्रताड़ना का शिकार हुआ है।’

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