नई दिल्ली:  कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शन के दौरान मेंगलुरु में की गई फायरिंग में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि पुलिस की वर्दी पहने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के लोग आए थे।

पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने कहा कि हम इस मुद्दे को छोड़ने वाले नहीं हैं। घटना में मारे गए दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। बहुत सारे वायरल वीडियो हैं। पुलिस ने कई राउंड फायरिंग की है। बता दें, मंगलोर में नागरिकता कानून के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन के हिंसक होने के बाद हुई पुलिस फायरिंग में दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी।

मंगलोर पुलिस कमिश्नर डॉ. हर्षा ने 2 मौतों की पुष्टि की। मारे गए प्रदर्शनकारियों के नाम जलील (49) और नौसीन (23) हैं। संवाददाता सम्मेलन में बोलते हुए कुमारस्वामी ने दावा किया कि पुलिस आयुक्त डॉ पी एस हर्ष ने घटना के बारे में झूठ बोला है। गोलीबारी से जुड़े तथ्य पुलिस विभाग द्वारा छिपाए जा रहे हैं।


आरएसएस के लोग शायद पुलिस की वर्दी पहने हुए थे। उन्हें अब निकाल दिया गया होगा लेकिन मुझे इसके बारे में पता नहीं है। 


इंस्पेक्टर शाताराम कुंदर के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए उन्होंने पुलिस फायरिंग में मारे गए दो लोगों का नाम आरोपी के तौर पर दर्ज किए जाने पर विभाग के कदम पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आगे कहा कि, मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को इस घटना को लेकर कोई पछतावा नहीं है। और ना ही वह इसे स्वीकार कर रहे हैं। दो परिवारों ने अपने बेटों को खो दिया है जो उनके कष्टों के बारे में जानते हैं।

कुमारस्वामी ने मंगलुरु शहर के उप-शहरी इलाके के प्रशासन में आरएसएस नेता प्रभाकर भट की भूमिका पर भी सवाल उठाए। कुमारस्वामी ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उनके प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये के चेक भी प्रदान किये। इस बीच मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये सहायता राशि देने की घोषणा की है।

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