सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना करते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने हज सब्सिडी को समाप्त कर दिया है. इस मामले में कांग्रेस के वरिष्ट नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सब्सिडी से हाजियों को नहीं बल्कि एयरलाइन कंपनियों को फायदा था.

ध्यान रहे मुस्लिम संगठनों की और से दायर याचिका पर 10 मई 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने 10 साल में हज सब्सिडी पूरी तरह खत्म करने का आदेश दिया था. जस्टिस आफताब आलम और रंजना प्रकाश देसाई की बेंच ने कुरान का उल्लेख करते हुए कहा था कि इसे खत्म करना जायज है.

आजाद ने कहा कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा हज सब्सिडी को खत्म करने की तय की गई सीमा से पहले ही इसे खत्म कर दिया है, हमें इससे कोई दिक्कत नहीं है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पार्ट-1 को ही सरकार ने लागू किया है और मुझे लगता है कि सरकार इस फैसले के पार्ट-2 को भी लागू करेगी. मैं यह साफ कर देना चाहता हूं कि सब्सिडी से हाजियों को नहीं बल्कि एयरलाइन कंपनियों को फायदा मिलता था.

आजाद ने कहा कि हज सब्सिडी की शुरुआत 1980 (जब आजाद एचसीआई के सदस्य थे) के दशक में हुई थी, जब हज यात्रियों को ढोने वाली जहाजें पुरानी होने लगी थीं. उन्होंने कहा, “बजट की कमी के कारण सरकार ने नई जहाजों की खरीद पर पैसा नहीं खर्च किया था. इस लिए श्रद्धालुओं को जेद्दाह ले जाने के लिए उड़ानें शुरू करने का फैसला किया गया था. लेकिन हवाई सफर जहाज के किराए से चार गुना महंगा था. इसलिए सरकार ने उस लागत का वहन करने के लिए सब्सिडी का भुगतान करना शुरू किया था.”

आजाद इस बयान पर सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे है. कांग्रेस को घेरते हुए एक यूजर ने आजाद से सवाल किया कि जब आप को पता था कि सब्सिडी से हाजियों को नहीं बल्कि एयरलाइन कम्पनियों को लाभ हो रहा है तो आपने कांग्रेस शासन में इसे बंद क्यों नहीं किया ? क्यों मुस्लिमो को कांग्रेस बदनाम करती रही ?

वहीँ एक अन्य यूजर ने लिखा कि कांग्रेस हमेशा से ही मुस्लिमों के साथ छल और कपट ही करती आई है. जिसके कारण मुस्लिम बदनाम होता आया है.

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