राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने मंगलवार को गहलोत सरकार के विधानसभा बुलाने के प्रस्ताव को तीसरी बार वापस लौटा दिया है। इस पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि तीसरी बार राज्यपाल ने प्रेम पत्र भेजा है। अब मैं उनसे मिलने जा रहा हूं, क्या बात है?

गहलोत ने कहा कि विधानसभा सत्र बुलाने का नोटिस 21 दिन का हो या 31 दिन का, जीत हमारी ही होगी। इससे पहले राज्यपाल कलराज मिश्र ने दो बार प्रस्ताव लौटा दिया। पहली बार में उन्होंने 6 आपत्तियां दर्ज कराई थीं। वहीं, दूसरी बार उन्होंने सही जानकारी और सवालों के जवाब ना होने के चलते प्रस्ताव लौटा दिया था।

तीसरी बार प्रस्ताव भेजने से पहले राजस्थान कैबिनेट की मंगलवार को बैठक हुई, जिसमें राज्यपाल द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर चर्चा की गयी। बैठक के बाद परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा, ‘हम 31 जुलाई से सत्र चाहते हैं। जो पहले प्रस्ताव था वह हमारा कानूनी अधिकार है। उसी को वापस भेज रहे हैं।’

राज्यपाल द्वारा उठाए गये बिंदुओं के बारे में खाचरियावास ने कहा, ‘हालांकि कानूनन उनको सवाल करने का अधिकार नहीं, फिर भी उनका सम्मान रखते हुए उनके बिंदुओं का बहुत अच्छा जवाब दिया है। अब राज्यपाल महोदय को तय करना है कि वे राजस्थान, हर राजस्थानी की भावना को समझें।… राज्यपाल यदि इस बार भी प्रस्ताव मंजूर नहीं करते हैं तो इसका आशय स्पष्ट है कि देश में संविधान नहीं है।

वहीं दूसरी और भाजपा विधायक मदन दिलावर ने बसपा के 6 विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के खिलाफ शिकायत पर राज्य विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में मंगलवार को नयी याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने सोमवार को उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि यह अब निरर्थक हो गयी है, क्योंकि विधानसभा अध्यक्ष शिकायत पर आदेश पारित कर चुके हैं।

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