मोदी सरकार से नहीं दी डेनमार्क जाने की मंजूरी तो अब केजरीवाल जलवायु परिवर्तन…

7:37 pm Published by:-Hindi News

नई दिल्ली : अरविंद केजरीवाल राजनीतिक म‍ंजूरी नहीं मिलने के कारण सी-40 जलवायु सम्मेलन में शामिल नहीं हो पाएंगे। लेकिन वह अब वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सी-40 जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन को संबोधित करेंगे।

दिल्ली सरकार द्वारा जारी बयान के अनुसार, अरविंद केजरीवाल ने समिट के आयोजकों का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करने का अनुरोध स्वीकार कर लिया है। शिखर सम्मेलन के सत्र ‘गहरी सांस लें, स्वच्छ हवा के लिए शहर का समाधान’ के दौरान मुख्यमंत्री का संबोधन होगा।

वे शुक्रवार को दोपहर 12 बजे दुनिया के छह प्रमुख शहरों के महापौरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे। प्रेस कॉन्फ्रेंस को C40 शहरों के कार्यकारी निदेशक मार्क वाट्स,  पेरिस के मेयर, ऐनी हिडाल्गो, लॉस एंजिल्स के मेयर एरिक गार्सेटी, कोपेनहेगन के मेयर फ्रैंक जेनसेन, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए), बार्सिलोना के मेयर अदा कोलैयू, पोर्टलैंड के मेयर टेड व्हीलर, लीमा के महापौर जॉर्ज मुनोज वेल्स को संबोधित करेंगे।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को डेनमार्क में जलवायु शिखर सम्मेलन में शिरकत करने की इजाजत नहीं देने के फैसले का बुधवार को बचाव करते हुए कहा था कि यह कार्यक्रम ‘मेयर स्तर के प्रतिभागियों के लिए है। वहीं, इस निर्णय से नाराज ‘आप ने इसे ”बेतुका बहाना और दिल्ली के लोगों का अपमान बताया।

आम आदमी पार्टी ने कोपेनहेगन में आयोजित जलवायु शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अनुमति नहीं देने को दिल्लीवालों का अपमान करार दिया है। पार्टी का कहना है कि इससे पहले इसी सम्मेलन में दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने शिरकत की थी। पार्टी का आरोप है कि दिल्ली सरकार के अच्छे कामों से केंद्र सरकार डर गई है। साथ ही चेतावनी दी है कि पार्टी इस मुद्दे को आम लोगों के सामने उठाकर भाजपा के झूठ का पर्दाफाश करेगी।

संजय सिंह ने आरोप लगाया कि इससे पहले भी दिल्ली सरकार के मंत्री मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन को विदेश जाने की सियासी मंजूरी नहीं दी गई थी। सिंह ने सवाल किया कि आखिर दिल्ली सरकार और केजरीवाल के काम से भाजपा क्यों डरती हैं?

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