नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने मोदी सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि देश में जिस तरह असहिष्णुता, सांप्रदायिक धुव्रीकरण और कानून हाथ में लेने वाले तत्वों के प्रभावी होने का खतरा बढ़ रहा है, उसमें सद्भावना पहले से कहीं ज्यादा जरूरत है।

राजीव गांधी सद्भावना पुरस्कार समारोह में संबोधित करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं से देश की शांति और सांप्रदायिक सद्भावना की क्षति पहुंचेगी। उन्होने कहा कि संवैधानिक मूल्यों को क्षति पहुंचाने वाले ऐसे तत्वों की प्रवृत्ति को रोककर ही देश की एकता और शांति को कायम रखा जा सकता है।

पूर्व प्रधानमंत्री ने वर्ष 2016-17 के लिए राजीव गांधी राष्ट्रीय सछ्वावना पुरस्कार से नवाजे गये पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल एवं गांधीवादी विचारक गोपाल कृष्ण गांधी की सराहना करते हुए कहा कि उनके वचन और कर्म में भारत की धर्मनरिपेक्षता, सहिष्णुता और विविधता के प्रति सम्मान की समृद्ध परंपरा झलकती है। उन्होंने कहा कि गोपाल गांधी जैसी शख्सियत यह कहने से नहीं हिचकती कि लोकप्रिय पदों पर बैठे लोगों को आंख बंद कर स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। ऐसी स्वीकार्यता से पहले उनकी राष्ट्रीय हित के लिए गहन पड़ताल की जानी चाहिए।

सोनिया गांधी ने राजीव गांधी की 74वीं जयंती पर उनकी स्मृतियों के साथ देश की राजनीति में उनके अमिट योगदानों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि राजीव का राजनीतिक जीवन बहुत छोटा रहा मगर इसी दौरान 21वीं सदी के भारत का रास्ता बनाने, युवाओं की मतदाता आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष करने, पंचायतराज व्यवस्था और महिलाओं को आरक्षण से लेकर बुनियादी जरूरतों को बेहतर करने की कई अहम योजनाओं से उन्होंने देश को नई दिशा दी।

गोपाल गांधी ने कहा कि राजीव के लिए सद्भावना कोई तरकीब नहीं थी बल्कि यह उनके नस्ल में थी। गांधी ने कहा राजनीति में विरोध और दुश्मनी तथा असहमति और देशद्रोह के फर्क को समझना होगा। उन्होंने कहा कि भले हिन्दुस्तान की आत्मा को कुछ समय के लिए बहलाया-फुसलाया जा सकता है पर उसकी सद्भावना की आत्मा कोई झुठला नहीं सकता।

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