गुजरात दंगों में 10 सदस्यों को खोने वाले फिरोज पठान अमित शाह के खिलाफ लड़ेंगे चुनाव

2002 में गुलबर्द सोसाइटी में हुए दंगों में अपने परिवार के 10 सदस्यों को खोने वाले फिरोज पठान गांधीनगर से भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। बता दें कि इन दंगों में 69 लोग मारे गए थे। जिसमे फिरोज के भाई इम्तियाज इस केस के गवाह हैं।

फिरोज गांधीनगर से वहीं इम्तियाज गुजरात के खेड़ा से लोकसभा चुनावों के लिए मैदान में उतरे हैं। 42 वर्षीय इम्तियाज ने अपना देश पार्टी के ओर से पर्चा भरा है। वहीं उनका चुनावी चिन्ह एक ‘प्रेशर कूकर’ है। वहीं दूसरी ओर बता दें कि फिरोज वही हैं जिन्होंने सोशल एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ और उनके पति जावेद आनंद और गुलबर्ग सोसाइटी के कुछ निवासियों के खिलाफ मामला दायर किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने गुलबर्ग के दंगा पीड़ितों के लिए जमा किए गए पैसे में धांधली की थी।

फिरोज ने कहा- ‘हमें गुलबर्ग (नरसंहार मामले) में न्याय नहीं मिला है और कोई भी हमारे मुद्दे को नहीं उठा रहा है। कोई अल्पसंख्यक सांसद नहीं है जो हमारे मुद्दे को उठाता। स्थिति अलग होती अगर जाफरी साहब (कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी जो नरसंहार में मारे गए थे) आज होते। लेकिन अब मैं एक सांसद के रूप में निर्वाचित होकर अल्पसंख्यकों के मुद्दों को उठाना चाहता हूं।’

इस चुनाव में अपनी उम्मीदवारी के बारे में बात करते हुए फिरोज़ ने कहा कि उनके पास दलितों, ठाकुरों, रैबारियों, भारवाडों और अन्य जातियों से वेजलपुर में दोस्तों का एक ग्रुप है, जिनकी मदद से वह डोर-टू-डोर अभियान चला रहे थे।

फिरोज ने कहा- ‘गांधीनगर सीट के क्षेत्र में करीब 19 लाख वोटर्स हैं। उनमें से मुश्किल से एक लाख मुस्लिम मतदाता हैं और ऐसा नहीं है कि मुसलमान भाजपा को वोट नहीं देते हैं। विधानसभा चुनावों में बीजेपी विधायक किशोर चौहान को काफी मुस्लिम वोट मिले। इसलिए मुझे नहीं लगता कि यह भाजपा को प्रभावित करेगा।’

वहीं अल्पसंख्यों के बारे में इम्तियाज ने कहा- ‘आज हर कम्यूनिटी के नेता है चाहें वो दलित हो या पफिर ठाकोर्स। ऐसे में अगर मैं चुनाव जीतता हूं तो मैं अल्पसंख्यकों की आवाज बनूंगा।’

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