Thursday, August 5, 2021

 

 

 

फर्जी मीडिया खबरों ने कोरोनावायरस को दिया हिन्दू-मुस्लिम का रंग: उमर कासमी

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भोपाल: मध्य प्रदेश कांग्रेस के सचिव मौलना उमर कासमी ने कोरोना वायरस को धार्मिक रंग देने की कड़ी आलोचना की है। साथ ही उन्होने सवाल उठाया कि इस मुसीबत की घड़ी में क्या लोगो में धर्म के नाम पर विभाजन जरूरी है।

कासमी ने कहा कि मीडिया के एक बड़े हिस्से ने कोरोना और तबलीगी जमात को लेकर बड़े पैमाने पर फर्जी खबरे प्रसारित की। जिसको फैलाने का काम हजारों व्हाट्सएप्प ग्रुप से बीजेपी की आईटी सेल ने फैलाने का काम किया। जिसका नतीजा ये हुआ कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी हिन्दू-मुस्लिम में भेदभाव देखने को मिल रहा है।

उन्होने कहा कि दिल्ली में दिलशाद उर्फ महबूब की लिंचिंग, हरियाणा के जींद में मुस्लिम परिवार की पिटाई, हिमाचल के मंडी में कश्मीरी मजदूरों को पीटना, कर्नाटक के विभिन्न हिस्सों में खाना बांटने को लेकर मुस्लिमों को पीटा गया। जो साफ तौर पर देश में प्लानिंग के तहत फैलाए जा रहे इस्लामोंफोबिया का नतीजा है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि इतना ही नहीं इस नफ़तर फैलाने पर मोदी सरकार की बड़ी भूमिका रही है। मोदी सरकार ने भी कोरोना के मामलों को तबलीगी जमात से जोड़ा। जिसका नतीजा आज पूरा मुस्लिम समुदाय भुगत रहा है। उन्होने कहा कि मोदी सरकार ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन का उल्लंघन किया है। उन्होने कहा कि गाइडलाइन में स्पष्ट तौर पर कोरोना के मामलों को देश, धर्म, स्थान, जाति, लिंग आदि के नाम पर लेबल देना वर्जित किया है।

कासमी ने कहा कि आज एक बार फिर से मोदी सरकार की भेदभाव वाली राजनीति देश की बदनामी का सबब बन रही है। उन्होने कहा, कोरोना के नाम पर हो रहे मुस्लिमों पर हो रहे हमलों की सयुंक्त राष्ट्र, अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग जैसी अंतराष्ट्रीय संस्था आलोचना कर ही है। वहीं द न्यूयॉर्क टाइम्स, द गार्डियन जैसी अखबारों में मुस्लिमों पर हमले और भेदभाव कि खबरे प्रकाशित हो रही है। कांग्रेस सचिव ने तत्काल फ्रजी खबरे फैलाने वाले मीडिया हाउस और सोशल मीडिया अकाउंट पर कार्रवाई की मांग की है।

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