केंद्र की मोदी सरकार द्वारा जारी किये गए GDP आकड़ों को फर्जी करार देते हुए भाजपा नेता और राज्‍यसभा सदस्‍य सुब्रमण्‍यन स्‍वामी अपनी ही पार्टी की सरकार पर भड़क उठे है.

शनिवार को अहमदाबाद में चार्टर्ड अकाउंटेंट के एक सम्‍मेलन में स्वामी ने स्‍वामी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी सरकार केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) के अधिकारियों पर दबाव डालकर फर्जी आकडे जारी करा रही है. ताकि नोटबंदी का अर्थव्‍यवस्‍था और जीडीपी पर प्रतिकूल प्रभाव दिख सके.

उन्होंने कहा, ‘कृपा करके जीडीपी के तिमाही आंकड़ों पर न जाएं। वे सब फर्जी हैं. यह बात मैं आपको कह रहा हूं, क्‍योंकि मेरे पिता ने सीएसओ की स्‍थापना की थी.’ हाल ही में मैं केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा (सांख्यिकी मंत्री) के साथ वहां गया था. उन्होंने सीएसओ के अधिकारी को बुलाया, क्योंकि नोटबंदी को लेकर अच्छे आंकड़े दिखाने का दबाव था. इसलिए उन्होंने ऐसे आंकड़े जारी किए, जिससे दिखे कि नोटबंदी का कोई असर नहीं था.

स्वामी ने कहा, मैं नर्वस महसूस कर रहा था क्योंकि मैं जानता था कि असर तो हुआ है. इसलिए मैंने सीएसओ के डायरेक्टर से पूछा, “आपने इस तिमाही के लिए जीडीपी के आंकड़े कैसे जारी किए, जबकि नोटबंदी तो नवंबर (2016) को हुई थी और आपने आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट फरवरी 2017 में प्रकाशित की, यानी प्रकाशन के लिए ये रिपोर्ट कम से कम तीन हफ्ते पहले गई होगी. तो आपने जनवरी 2017 में रिपोर्ट पेश की और आपने बता दिया कि नोटबंदी का कोई असर नहीं हुआ. आपने इसकी गणना कैसे की?”

स्वामी ने दावा कि उनके सवाल पर सीएसओ के निदेशक का कहना था कि उन्होंने मोदी सरकार के दबाव के चलते ये आंकड़े देश के सामने रखे हैं. स्वामी ने कहा कि इस तरह की किसी भी तिमाही आंकड़ों पर विश्वास नहीं करना चाहिए. सिर्फ सालाना जीडीपी रिपोर्ट पर विश्वास करना चाहिए.

स्वामी ने रेटिंग एजेंसियों की रिपोर्ट पर भी सवाल उठाते हुए कहा, “इन मूडी और फिच की रिपोर्ट्स पर यकीन मत कीजिए. आप उन्हें पैसे देकर किसी भी तरह की रिपोर्ट प्रकाशित करवा सकते हैं.” मूडी ने हाल ही में भारत की क्रेडिट रेटिंग बढ़ाई थी. रेटिंग में ये इजाफा 13 साल बाद किया गया था.

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