आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा भारतीय सेना को लेकर दिए गए विवादित बयान के बाद संघी खेमे की चौतरफा आलोचना हो रही है. ऐसे में जब केंद्रीय मंत्री उमा भारती से जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि आजादी के बाद जब पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर पर हमला किया था तब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने आरएसएस से मदद मांगी थी.

उन्होंने कहा कि आजादी के बाद कश्मीर के राजा महाराजा हरि सिंह संधि पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे थे और शेख अब्दुल्ला ने हस्ताक्षर करने के लिए उन पर दबाव डाला. उन्होंने कहा कि नेहरू दुविधा में थे और फिर पाकिस्तान ने एका एक हमला कर दिया और उसके सैनिक उधमपुर की तरफ बढ़ने लगे.

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘उस समय नेहरूजी ने गुरू गोवलकर (तत्कालीन आरएसएस प्रमुख एम एस गोवलकर) आरएसएस के स्वयंसेवकों की मदद मांगी. आरएसएस स्वयंसेवक मदद के लिए जम्मू-कश्मीर गए थे.’’ हालांकि उन्होंने मोहन भागवत के बयान पर बोलने से इनकार कर दिया.

इस दौरान झांसी की सांसद साध्वी उमा भारती ने उनके राजनीतिक संन्यास को लेकर चल रही अटकलों को भी खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि वह तीन साल तक कोई चुनाव नहीं लड़ेंगी, लेकिन पार्टी के लिए काम करती रहेंगी.

उमा भारती ने कहा कि कमर और घुटने में दर्द की वजह से मैं अगले तीन साल तक आराम करना चाहती हूं और कोई चुनाव नहीं लड़ूंगी. हालांकि अभी मंत्री पद पर बनी रहूंगी. मेरी राज्यसभा में भी जाने की कोई इच्छा नहीं है.

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