कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने घाटी के मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए जनसत्ता में लिखे अपने लेख में कहा कि हम कश्मीर को खोने के कगार पर हैं. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पीडीपी-भाजपा सरकार और केंद्र सरकार ने जो नीतियां अख्तियार की हुई हैं उनके चलते हम कश्मीर को खो रहे हैं.

उन्होंने धारा 370 को लेकर कहा कि 1947 में ‘एक महान सौदे’ के तहत कश्मीर का भारत में विलय हुआ था. जो कि भारत के संविधान का अनुच्छेद-370 हैं. इस अनुच्छेद के उल्लंघन को लेकर उग्र प्रतिक्रिया आ रही हैं. चिदंबरम ने कहा है कि कश्मीर में हथियार उठाने वालों और इसे (कश्मीर) पाकिस्तान के साथ मिलाने की मांग करने वालों की संख्या केवल सैकड़ों में है, जबकि कश्मीरी जनता का भारी बहुमत स्वतंत्रता की मांग करता है.

उन्होंने कहा कि जहां राज्य में पीडीपी और भाजपा की मौजूदा सरकार बेबस नजर आ रही है, वहीं सशस्त्र बलों ने असंतोष और गड़बड़ी पर काबू पाने के बल का उपयोग कर रही है. कांग्रेस नेता ने कहा, जुलाई 2016 से 20 जनवरी 2017 तक, जम्मू-कश्मीर में पचहत्तर लोगों की जिंदगी हिंसा की भेंट चढ़ चुकी है. इसके अलावा, बारह हजार लोग घायल हुए, और पैलेट गन के इस्तेमाल के चलते एक हजार लोग अपनी एक आंख की रोशनी गंवा बैठे और पांच व्यक्ति अंधे हो गए हैं.

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उन्होंने कश्मीर के मौजूदा हालात में सुधार लाने के लिए निम्न उपाय बताए

1. पीडीपी-भाजपा सरकार को इस्तीफा देने के लिए कहा जाए और वहां राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए। एनएन वोहरा ने राज्यपाल के तौर पर बहुत अच्छा काम किया है, पर अब समय आ गया है कि नया राज्यपाल नियुक्त किया जाए।
2. यह घोषणा की जाए कि केंद्र सरकार सभी पक्षों से बातचीत शुरू करेगी। बातचीत की शुरुआत सिविल सोसायटी समूहों और छात्र नेताओं से की जा सकती है। अंत में अलगाववादियों से भी बात हो।
3. बातचीत का रास्ता साफ करने के लिए वार्ताकारों की नियुक्ति की जाए।
4. सेना और अर्ध-सैनिक बलों की तैनाती घटाई जाए और घाटी में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी जम्मू-कश्मीर पुलिस को सौंपी जाए।
5. पाकिस्तान से लगी सरहद की हर हाल में रक्षा हो, सीमा पर घुसपैठियों के खिलाफ निरोधक कार्रवाई की जाए, लेकिन घाटी में ‘आतंकवादी-निरोधक कारवाई’ फिलहाल रोक दी जाए।
अगर सख्त बयानों तथा और भी कड़ी कार्रवाई की मौजूदा दवा जम्मू-कश्मीर में काम नहीं कर पा रही है, तो क्या यह वक्त का तकाजा नहीं है कि एक वैकल्पिक उपचार को आजमाया जाए?

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