Saturday, July 31, 2021

 

 

 

रमजान को लेकर न करें राजनीति, मुसलमान पूरे जोश के साथ डालेंगे अपना वोट: ओवैसी

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लोकसभा चुनाव की तारीखें रमजान के महीने में होने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। इसी बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव आयोग के फैसले का स्वागत किया है। साथ ही राजनीतिक पार्टियों से रमजान पर राजनीति न करने की अपील की है।

ओवैसी ने कहा, ‘यह पूरा विवाद गैरजरूरी और पूरी तरह से अवांछित है। मैं राजनीतिक दलों से अनुरोध करना चाहूंगा कि उनका चाहे जो भी कारण हो, वे मुस्लिमों और रजमान का इस्तेमाल करना बंद करें।’ उन्होंने कहा, ‘मुस्लिम निश्चिम रूप से रमजान महीने का व्रत करते हैं। वे बाहर जाते हैं, रोजाना का अपना काम करते हैं। वे ऑफिस जाते हैं। यहां तक कि गरीब से गरीब मुसलमान व्रत रखता है। मुझे लगता है कि रमजान महीने में और ज्यादा मतदान होगा क्योंकि इस दौरान मुसलमान सांसारिक कार्यों से मुक्त होता है।’

उन्होंने कहा, ‘चांद दिखने के बाद रमजान पांच मई से शुरू होगा। ईद चार या पांच जून में पड़ेगी। चुनाव आयोग को चुनावी प्रॉसेस तीन-चार जून से पहले खत्म कर लेना है। जाहिर है कि रमजान से पहले चुनावी प्रॉसेस खत्म नहीं किया जा सकता और ईद के बाद चुनाव हो नहीं सकते। यह बात हर किसी को समझने की जरूरत है। बिना वजह इस पर राजनीति न की जाए।’

ओवैसी ने कहा कि रमजान आएगा और मुसलमान पूरे जोश से रोजा रहेंगे और वोट भी करेंगे। रोजा रहने और रमजान महीने में चुनाव होने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। उन्होंने कहा कि रमजान में तो मुसलमानों का ईमानी और रूहानी स्तर और ज्यादा हो जाता है और उन्हें विश्वास है कि रमजान में ज्यादा वोटिंग होगी।

दरअसल, कोलकाता के मेयर और टीएमसी के मंत्री फिरहद हाकिम ने रजमान और सात चरणों में लोकसभा चुनाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव का कार्यक्रम रमजान के पवित्र महीने से टकरा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार नहीं चाहती कि चुनावों में मुस्लिम समुदाय बड़ी संख्या में वोट करे।

हाकिम ने कहा, ‘चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और हम उसका सम्मान करते हैं। हम उसके खिलाफ कुछ नहीं कहना चाहते लेकिन सात चरणों का चुनाव बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी करेगा। यह उनके लिए और मुश्किल भरा होगा जो उस समय रमजान के व्रत में होंगे।’ मेयर ने कहा कि इन तीन राज्यों में मुस्लिमों की आबादी बड़ी संख्या में है और चुनाव आयोग को इसका ध्यान रखना चाहिए था।

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