Friday, January 28, 2022

सत्ता में कोई हो अपराध न्याय व्यवस्था में मुस्लिमों के साथ होता है भेदभाव: ओवैसी

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रामपुर में सीआरपीएफ कैंप पर आतं*की हमले के आरोपी गुलाम खान और कौसर खान के बरी होने के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन यानी एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख और हैदराबाद लोकसभा क्षेत्र के सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने अपराध न्याय व्यवस्था में मुस्लिमों के साथ का आरोप लगाया।

ओवैसी ने ट्वीट किया, ‘टेरर केस में मुस्लिमों को जेल भेज दिया जाता है और सालों बाद सिर्फ रिहाई हाथ लगती है। हम आपराधिक न्याय प्रणाली में प्रणालीगत भेदभाव का अनुभव करते हैं। ओवैसी ने कहा, ‘यह दोहरा अन्याय केवल गुलाब खान के लिए ही नहीं, बल्कि रामपुर हमले के पीड़ितों के लिए भी है।’

एक अन्य ट्वीट में ओवैसी ने पूछा, ‘असली अपराधी कौन थे? क्या गुलाब खान को उस अपमान के लिए मुआवजा दिया जाएगा जो उन्हें और उनके परिवार को सहना पड़ा था?’ रामपुर की कोर्ट द्वारा 12 साल बरी किए जाने के बाद गुलाब खान जब घर पहुंचे, तो उनका स्वागत किया गया। इस दौरान गुलाब खान ने कहा, ‘मुझको अल्लाह ने नई जिंदगी दी है।’

गुलाब ने बताया – जब एटीएस ने उन्हें गिरफ्तार किया, तो तीन महीने तक यह बताया ही नहीं गया कि आखिर किस जुर्म में पकड़ा गया है। वह याद करते हुए कहते हैं, वो 31 दिसंबर 2007 की रात थी। एसटीएफ अचानक से आकर उन्हें गिरफ्तार कर लेती है। वजह पूछने पर भी कुछ नहीं बताया गया। इसके बाद उन्हें जेल में डाल दिया गया। तीन महीने बाद उन्हें पता चला कि उन पर सीआरपीएफ कैंप पर हुए हमले में शामिल आतंकियों की मदद करने का आरोप है।

12 साल जेल में रहे गुलाब अपनी मां को खो चुके हैं। बेटे पर आतंकी होने का आरोप लगने के सदमे में मां नहीं रहीं। इसके बाद मौसी का भी निधन हो गया। दोनों के जनाजे में गुलाब शामिल नहीं हो सके। गुलाब बताते हैं- जब उनकी गिरफ्तारी हुई तो तीन बच्चों में सबसे छोटा एक डेढ़ साल का बेटा था। वह एक ऐसे पिता हैं, जो अपने बच्चों को बढ़ता हुआ नहीं देख सके। इन 12 सालों में पत्नी ने परिवार को संभाले रखा।

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