हैदराबाद | कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह अक्सर अपने ट्वीट और बयानों के लिए सुर्खियों में रहते है. विरोधियो को अपने तर्कों से मात देने की कला में माहिर दिग्विजय सिंह इस बार एक ट्वीट को लेकर फंस गए. इस ट्वीट में दिग्विजय सिंह ने मदरसों पर टिप्पणी करते हुए कहा की मदरसे नफरत फैलाते है. लेकिन हंगामा होने के बाद वो अपने बयान से पलट गए.

हैदराबाद में कांग्रेस की समन्वय समिति की बैठक में हिस्सा लेने आये दिग्विजय सिंह ने सफाई देते हुए कहा की मैंने कभी नही कहा की सभी मदरसे नफरत फैलाते है. ऐसा नही है.. सभी मदरसे नफरत नही फैलाते. भारत में करीब 97 फीसदी मुस्लमान अपने बच्चो को मदरसे में नही पढ़ाते. केवल कुछ मदरसे ही कट्टरवाद और नफरत फैलाते है. हालाँकि दिग्विजय ने आरएसएस के सरस्वती शिशु मंदिर स्कूलों के बारे में अपनी राय को बरकारा रखा.

उन्होंने कहा की आरएसएस के सभी स्कूल मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति घृणा फ़ैलाने का काम करते है. उन्होंने कहा की कांग्रेस एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी है जो संप्रदायिकता फ़ैलाने वालो का हमेशा से विरोध करती आई है. हम मुसलमानों के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है. दिग्विजय ने मध्यप्रदेश में पकडे गए 11 ISI एजेंटों का भी जिक्र किया.

उन्होंने कहा की चूँकि पकडे गए सभी एजेंट बीजेपी कार्यकर्त्ता और हिन्दू थे इसलिए मीडिया में इस खबर को ज्यादा नही चलाया गया. उन्होंने मीडिया के वर्ग पर मुसलमानों के प्रति पक्षपाती रवैया अपनाने का आरोप लगाया. मालूम हो की दिग्विजय सिंह ने एक ट्वीट में लिख था,’ मुझे मदरसों और राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ द्वारा चलाये जा रहे सरस्वती शिशु मंदिर स्कूलों में कोई अंतर नजर नही आता. दोनों ही नफरत फ़ैलाने का काम करते है’.

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