कोलकाता | 8 नवम्बर 2016 जब प्रधानमंत्री अचानक से देश को संबोधित करने के लिए आये तो लोगो को लगा की शायद सरकार पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध की घोषणा करनी वाली है. लेकिन सरकार ने पाकिस्तान के साथ नही बल्कि कालेधन को खत्म करने के नाम पर 500 और 1000 के नोटों के खिलाफ युद्ध छेड़ने की घोषणा की. मोदी ने 500 और 1000 के नोटों को यह कहकर प्रतिबंधित करने की बात कही की इससे लोगो का कालाधन उनकी अलमारी में रखा सड जायेगा.

इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा की यही कालाधन देश के खिलाफ लड़ रहे आतंकवादियों और नक्सलियों को और ताकत दे रहा है. मोदी ने उस समय इस कदम को भ्रष्टाचार का काल बताते हुए देश के लोगो से सहयोग की अपील की. उन्होंने कहा की इस यज्ञ में आप भी अपने सहयोग की आहुति दे. मोदी के इस कदम ने पुरे देश में भूचाल ला दिया. लेकिन फिर भी लोगो ने बिना उफ़ किये इस कदम का समर्थन किया.

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लोगो को लगा की इससे देश बदलेगा. इसलिए उनकी नौकरी चली गयी तो भी उन्हें गम नही हुआ,  15 लाख लोगो की नौकरी चली गयी, लोगो का कारोबार चौपट हो गया, कई लोग एटीएम की लाइन में लगे लगे दुनिया से चले गए लेकिन फिर भी उन्होंने सड़क पर उतर इस कदम का विरोध नही किया. लेकिन अब जबकि आरबीआई ने नोट बंदी से सम्बंधित आंकड़े जारी कर दिए है तो मोदी सरकार से सवाल जरुर पूछे जाने चाहिए.

आरबीआई के आंकड़ो के बाद यह तय है की नोट बंदी फेल हो गयी है. हालाँकि सरकार अब अभी भी यह कह रही है की नोट बंदी का उद्देश्य पूरा हुआ. लेकिन विपक्ष कल से ही सरकार के खिलाफ आक्रमक रुख अपनाए हुए है. तृणमूल कांग्रेस नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा की जैसे नसबंदी ने 1977 में इंदिरा गाँधी को हराया था उसी तरह जनता मोदी को नोट बंदी की वजह से 2019 में हराएगी. उधर कांग्रेस ने नोट बंदी जैसे कदम के लिए मोदी से देश से माफ़ी मांगने की अपील की है.

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