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आजादी के बाद से ही आरक्षण को लेकर भेदभाव झेल रहे मुस्लिम और ईसाई दलितों के लिए पीस पार्टी की और से आरक्षण की मांग उठाई गई। पार्टी ने पूरे उत्तरप्रदेश में काला दिवस मनाते हुए राष्ट्रपति के नाम हर जिला मुख्यालय में ज्ञापन सौंपा है।

ज्ञापन में कहा गया कि 10 अगस्त 1950 को तत्कालीन कांग्रेस पार्टी की सरकार ने राष्ट्रपति द्वारा अध्यादेश जारी कराकर सिर्फ हिंदू दलित को अनुसूचित जाति का आरक्षण का लाभ प्रदान करने की व्यवस्था दी। सन 1956 में सिक्ख धर्म की दलित जातियों को और सन 1990 में बौद्ध धर्म की दलित जातियों को अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ दिया। लेकिन मुसलमानों और ईसाई धर्म की दलित जातियों को अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया।

ज्ञापन में 10 अगस्त 1950 के राष्ट्रपति के अध्यादेश को वापस लिए जाने की मांग की ताकि मुसलिम और ईसाई जाति के दलितों को भी आरक्षण का लाभ मिल सके। ज्ञापन में कहा गया कि अगर इसे वापस नहीं लिया गया तो एक विशाल जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

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ज्ञापन में कहा गया, हमारे संविधान के अनुच्छेद 15 से लेकर 21 तक देश के सभी नागरिकों को बिना धार्मिक, जातीय, क्षेत्रीय भेदभाव के बराबर अधिकार देने की व्यवस्था करती है। हिन्दू, सिक्ख व बौद्ध धर्म के अनुसूचित जाति को आरक्षण की व्यवस्था है, लेकिन मुसलमान व इसाई धर्म के अनुसूचित जातियों को आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया है। इससे संविधान का स्पष्ट उल्लंघन हो रहा है।

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