हैदराबाद: तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर ने गुरुवार यानी छह सितंबर को मंत्रिमंडल की बैठक बुलाकर विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव पारित कर दिया। इस प्रस्ताव को राज्यपाल ईएसएल नरसिंहन की भी मंजूरी मिल गई। ऐसे में राजनीतिक पार्टियों ने सियासी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है।

विधानसभा भंग करने के साथ ही सबकी नजरे राज्य के अल्पसंख्यक वोटों पर है। जिनके दम पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) सत्ता मे हिस्सेदार रही है। हालांकि अब टीआरएस प्रमुख केसीआर ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि “हम चुनाव अकेले लड़ेंगे, लेकिन बेशक हम AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) के मित्र हैं।”

वहीं दूसरी और कांग्रेस ने कहा है कि राज्य में समय से पहले होने जा रहे विधानसभा चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम से गठबंधन का कोई सवाल ही नहीं है और मुख्यमंत्री पद का फैसला चुनाव के बाद विधायकों की राय के आधार पर होगा। कांग्रेस के तेलंगाना प्रभारी रामचंद्र खूंटिया ने यह भी दावा किया कि टीआरएस नेता के. चंद्रशेखर राव ने समय से पहले विधानसभा भंग की ताकि अल्पसंख्यकों के वोट ले सकें और फिर लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चले जाएं।

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खूंटिया ने भाषा के साथ बातचीत में कहा, कांग्रेस तेलंगाना में चुनाव लड़ने और जीतने के लिए पूरी तरह तैयार है। टीआरएस की ओर से उम्मीदवार घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, टीआरएस एक व्यक्ति और परिवार की पार्टी है। कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है और संगठन में सभी स्तर पर विचार-विमर्श के बाद उम्मीदवारों का फैसला होता है। उम्मीदवारों की घोषणा उचित समय पर कर दी जाएगी।

ओवैसी की पार्टी के साथ गठबंधन की संभावना के बारे में सवाल पर खूंटिया ने कहा, एमआईएमआईएम के साथ तालमेल का सवाल ही नहीं है। लेकिन तेलंगाना जन समिति और भाकपा जैसे दलों के साथ गठबंधन को लेकर बातचीत होगी। उन्होंने दावा किया, मुस्लिमों, दलितों और दूसरे कमजोर वर्गों को न तो केसीआर में भरोसा है और न ही ओवैसी में भरोसा है। क्योंकि ये दोनों सिर्फ अपने परिवार के विकास पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं।

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